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RSS की मुस्लिम इकाई ने कहा- बकरीद पर कुर्बानी वैसे ही ‘हराम’ जैसे तीन तलाक

आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि कुरान के सबसे लंबे अध्याय 'अल बकराह' का नाम 'गाय माता' के नाम पर रखा गया था।
Author August 30, 2017 20:06 pm
मुस्लिम राष्‍ट्रीय मंच द्वारा प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर बकरीद पर कुर्बानी न देने की अपील की गई। (Photo: IANS)

बकरीद पर कुर्बानी के नाम पर जानवरों की दी जाने वाली बलि के विरोध में खुद मुस्लिम समाज खड़ा हो गया है। मंगलवार को मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सदस्यों ने बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी का कड़ा विरोध जताया। विश्व संवाद केंद्र में मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच यूपी के सह-संयोजक अधिवक्ता खुर्शीद आगा ने कहा, “बकरीद में कुर्बानी को लेकर समाज में अंधविश्वास फैला है, मुसलमान अपने आपको ईमान वाला तो कहता है, लेकिन वास्तव में अल्लाह की राह पर चलने से भ्रमित हो गया है।” उन्होंने कुर्बानी का विरोध करते हुए प्रश्न उठाया कि कुर्बानी जायज नहीं है तो फिर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जा रही है? उन्होंने आयोध्या के विवादित ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि कुरान के अनुसार, जहां फसाद हो वहां नमाज अदा नहीं की जा सकती है तो फिर विवादित ढांचे की जगह मस्जिद कैसे बनाई जा सकती है। वहीं पूर्वी उप्र के मंच संयोजक ठाकुर राजा रईस ने कहा, “जब हजरत इब्राहिम द्वारा किसी जानवर की कुर्बानी नहीं दी गई तो फिर मुस्लिम समाज में बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जा रही है। बकरीद में जानवरों की कुर्बानी के नाम पर जानवरों का कत्ल हो रहा है, यह कुर्बानी नहीं है।” उन्होंने कहा, “रसूल ने फरमाया है, “पेड़-पौधे, पशु-पक्षी अल्लाह की रहमत है, उन पर तुम रहम करोगे। अल्लाह की तुम पर रहमत बरसेगी।” उन्‍होंने कहा कि बकरीद पर कुर्बानी तीन तलाक की तरह हराम है।

संयोजक (अवध प्रांत) सैयद हसन कौसर ने गाय की कुर्बानी को हराम बताते हुए कहा, “‘तीन तलाक’ की तरह ही बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी एक कुरीति है। हम सब 21वीं सदी में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसलिए समाज को बुरी कुरीतियों से निकालना होगा।” इससे पहले, 22 अगस्‍त को आरएसएस से जुड़े दर्जनों मौलवियों ने बकरीद पर गोहत्या न करने की शपथ ली थी।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा आयोजित समारोह में मौलवियों ने सांप्रदायिक सौहार्द के लिए पूरे देश में बकरीद पर गाय की कुर्बानी न देने के संदेश का प्रसार करने की शपथ ली थी। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मौलाना कौकब मुज्तबा ने कहा कि मुसलमानों को गोहत्या के खिलाफ बोलना चाहिए, क्योंकि “इस परंपरा से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।”

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि गाय इस्लाम में बेहद सम्मानित पशु है, क्योंकि कुरान के सबसे लंबे अध्याय ‘अल बकराह’ का नाम ‘गाय माता’ के नाम पर रखा गया था। कुमार ने कहा कि पैगंबर ने बीफ खाने को लेकर कहा है कि यह कई बीमारियां पैदा कर सकता है, जबकि दूध और घी से ‘इलाज और उपचार’ किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “जो लोग पशुओं की बलि दे रहे हैं और इसे मारकर खा रहे हैं, वह बीमारी और जहर खा रहे हैं।”

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  1. C
    C J Christopher
    Sep 2, 2017 at 12:15 pm
    क्या पा हैं ये योगी तो हो गया हैं उसे मुस्लिम विरोध के अलावा कुछ दीखता ही नहीं हैं क्या हैं ये / कुरआन के दुशमन कुरआन की सीख दे रहे हैं कुछ बिकाऊ भड़वो को खड़ा कर के मुसलमानो का रहनुमा बना दिया. अरे ये तो बिकाऊ लोग हैं जो आरएसएस बोलेगा वही ये बोलेगे इन्हे इस्लाम और मुसलमानो से कुछ लेना देना नहीं ये बल्कि ये लोग तो खुद मुस्लमान हैं ही नहीं सिर्फ मुस्लिम नाम रख लेने से कोई मुस्लमान थोड़े ही हो जाता हैं . ये तो न घर के हैं न घाट के हैं बिकाऊ भड़वे, अपनी घर की बीवी को भी बेच खाये वो हैं ये तो.
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    1. N
      NYZIND
      Aug 31, 2017 at 9:31 am
      भारत मे 60 प्रतिशत से भी ज्यादा लोग मांसाहारी है । RSS की मुस्लिम इकाई को साल के बाकी दिनो मे जीव हत्या नहीं दिखता है । शर्म करो ......
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      1. B
        bitterhoney
        Aug 31, 2017 at 8:25 am
        शायद आरएसएस के मुस्लिम मंच के लोगों को यह नहीं मालूम कि इक्कीसवीं सदी में मुसलमान होना भी हराम है उनको तुरंत हिन्दू धर्म अपना लेना चाहिए वरना वह मार दिए जाएंगे.
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        1. B
          bitterhoney
          Aug 31, 2017 at 8:14 am
          अगर आरएसएस के मुस्लिम मंच को इक्कीसवीं सदी में क़ुरबानी अंधविश्वास पर आधारित लगती है तो उनको मूर्ती पूजा और शिव पूजा का भी विरोध करना चाहिए क्योंकि यह भी अंधविश्वास और कुरीतियों पर आधारित हैं जिसको आज का सभ्य समाज मानने को तैयार नहीं है. जहाँ तक जीव हत्या का प्रश्न है तो इक्कीसवीं सदी में यह बात सिद्ध हो चुकी है कि पेड़ पौधे भी जीवित हैं इनको काटना भी जीव हत्या है इसलिए आरएसएस के मुस्लिम मंच के लोगों को साग सब्जी फल कुछ नहीं खाना चाहिए केवल हवा खाकर जीवन व्यतीत करना चाहिए. मैंने जो लिखा है उसपर आरएसएस के मुस्लिम मंच कि टिप्पणी की प्रतीक्षा कर रहा हूँ.
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          1. S
            Salim
            Aug 31, 2017 at 12:46 am
            हाहाहा बंच ऑफ़ जोकर्स कुरआन में क़ुरबानी का ज़िक्र है १४०० सालों से चली आ रही है पुरे दुनिया में हो रही है और आरएसएस के हिजड़े कहते है क़ुरबानी हराम.खुद इब्राहीम अ.ने अपने बेटे को जबह करना चाहा तो दूमबा जानवर उनकी जगह आ गया और उनकी क़ुरबानी दी कुरआन में लीखा है और ये जाहीले लगता है कुरआन की जगह गीता पढ़ रहे है.
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            1. N
              Nomani
              Aug 30, 2017 at 7:00 pm
              Sab munafiq (hypocrates) hain. Surat baqarah ka Nam baqarah (Gaey) is like hai k us men Gaey zibah karne ka zikr hai. Han! Jahan qanoon mana karta hai wahan Gaey nahee katnee chahiye. Waisey Gaey ko mata manna andh wish was hi to hai.
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              1. N
                Nomani
                Aug 30, 2017 at 6:57 pm
                Sab munafiq (hypocrates) gain. Surat baqarah ka Nam baqarah (Gary) is I like hai k us men Gaey zibah karne ka Nam hair. Han! Jahan qanoon mama karta hair wahan Gaey nahee katnee chahiye. Waisey Gary no mats manna andh wish was hi to hai.
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                1. Y
                  yoginath
                  Aug 30, 2017 at 6:42 pm
                  Indresh Jee, yedi Muslim log beef ke naam pe jahar kha rahe hai to khane to do, marne do unko, tumara kaam aasaan ho jayegaa, tum logo ko unko marne kee jariirat nahee padegee vo khud hee jahara khaake mar jayege, aap logo ko unko beef khilana chahiye so that muslamn jaldee hee beef( jahar) khaake mar jaye :-) jai Gau Mata
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