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यूपी: अलीगढ़ में तनाव, मुस्लिम शख्स को दफनाने का हिंदुओं ने किया विरोध

प्रशासन ने जमीन का एक हिस्सा कब्रिस्तान के लिए दिलवाकर मामले को सुलझा लिया है।
प्रतीकात्मक फोटो (Dreamstime)

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में गुरुवार (12 अक्टूबर) को दो समुदायों के बीच एक 75 वर्षीय मृतक को दफनाने को लेकर तनाव हो गया। एक धर्म के मृतक को श्मशान में दफनाने का दूसरे समुदाय ने विरोध किया। जिस छह बीघा जमीन पर श्मशान स्थिति है वो सरकारी दस्तावेज में श्मशान के लिए आवंटित है लेकिन पिछले कुछ सालों से उसका इस्तेमाल दोनों समुदाय करते आ रहे थे। पिछले साल से जब ये बात सामने आयी कि जमीन श्मशान के लिए आवंटित है तो एक समुदाय के कुछ लोगों ने वहां शव दफनाने का विरोध करना शुरू कर दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया को मोहम्मद अनील ने बताया कि पिछले साल एक परिवार ने जब जमीन के कब्रिस्तान माने जाने वाले हिस्से में शव को अग्निदाह किया तो दूसरे समुदाय ने आपत्ति की। विवाद बढ़ने पर पुलिस बुलायी गयी और जब ये सामने आया कि जमीन का वो हिस्सा भी श्मशान के लिए ही है तो मामला शांत हो गया। अनील गुुरुवार को दफनाये जा रहे मोहम्मद शम्सुद्दीन के भतीजे हैं।

ये घटना अलीगढ़ के सलेमपुर गाँव की है। गाँव के चौकीदार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “हमारे समुदाय के लोगों ने दफन करने से रोका क्योंकि वो जमीन श्मशान की है और दूसरे समुदाय को उसका इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं।” स्थानीय सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा ने टीओआई को बताया कि पिछले कई सालों से जमीन का इस्तेमाल दोनों समुदाय करते आ रहे थे लेकिन जब ये बात सामने आयी कि वो जमीन श्मशान के लिए है तब से समस्या होने लगी। वर्मा ने टीओआई को बताया कि ये मुद्दा हल हो गया और छह में से एक बीघा जमीन श्मशान के लिए दे दी गयी है, चूंकि गाँव में अल्पसंख्यकों की आबादी बहुत कम है इसलिए इतनी जमीन उनके लिए पर्याप्त होगी।

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