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अनहोनी के अंदेशे से परेशान हैं उत्तर प्रदेश के अफसर

विधानसभा चुनाव में इस बार किसी अनहोनी के अंदेशे से परेशान उत्तर प्रदेश के आला अफसरों ने केंद्र सरकार से भारी संख्या में केंद्रीय बल की मांग की है।
Author नई दिल्ली | January 24, 2017 01:08 am

विष्णु मोहन
विधानसभा चुनाव में इस बार किसी अनहोनी के अंदेशे से परेशान उत्तर प्रदेश के आला अफसरों ने केंद्र सरकार से भारी संख्या में केंद्रीय बल की मांग की है। पिछले चुनावों की अपेक्षा इस बार लगभग तीन सौ कंपनियां अधिक मांगी गई हैं। अफसरों को अंदेशा है कि पश्चिम से मध्य उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव के शुरुआती तीनों चरणों में हिंसा हो सकती है। इसकी खास वजह मुजफ्फरनगर दंगों के बाद अल्पसंख्यकों व जाट और अन्य समुदायों के बीच पनपा तनाव है। औपचारिक तौर पर हालांकि अफसरों का दावा है कि हालात सामान्य हैं पर खुफिया रिपोर्टों को वे नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं।

जानकारों के अनुसार इस बार उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के विभिन्न चरणों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 964 कंपनी केंद्रीय सुरक्षा बल मांगा गया है। सुरक्षा इंतजामों से जुड़े अफसरों की मानें तो 2007 के विधान सभा चुनावों के मुकाबले इस बार लगभग 44 फीसद मतदान केंद्र अधिक हैं। जबकि बीते विधानसभा चुनाव की तुलना में 14 फीसद अधिक है। इस अनुपात में 2007 में केंद्र से 668 और 2012 में 695 कंपनी सुरक्षा बल आबंटित हो सका था। अफसरों की कोशिश है कि किसी तरह से फोर्स के जरिए चुनाव सकुशल निकाल लिया जाए।

केंद्रीय खुफिया एजंसी हो या स्टेट इंटेलिजेंस, सभी ने चुनाव के दौरान गड़बड़ी का अंदेशा जताया है। इन खुफिया रिपोर्टों के सार्वजनिक होने की दशा में हालात पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका के मद्देनजर आला अफसरों ने इस बाबत चुप्पी साधी हुई है। अफसरों के अनुसार 11, 15 व 19 फरवरी को प्रस्तावित पहले, दूसरे व तीसरे चरण के मतदान को लेकर खास चौकन्ना रहने की जरूरत है। सूत्रों के अनुसार खुफिया एजंसियों ने आगाह किया हुआ है कि इन चरणों के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में अराजकता फैलाने की कोशिश हो सकती है। एजंसियों ने इसके पीछे कई कारण गिनाए हैं। इनमें दंगे के बाद उपजी वैमनस्यता, प्रत्याशियों के आपसी समीकरण, जातीय व अन्य कारण शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आई विभिन्न रिपोर्टों को संज्ञान में लेते हुए चुनाव आयोग पहले ही राज्य के आला पुलिस अफसरों को यह साफ कह चुका है कि अवैध शस्त्रों, अराजक तत्वों, नाजायज शराब, मादक पदार्थ आदि के खिलाफ अभियान चला कर कार्रवाई की जाए। ऐसे में अगर कोई चूक रह जाती है तो गड़बड़ी का सारा ठीकरा अफसरों के माथे फूटेगा। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) दलजीत चौधरी ने हालांकि माना कि इस बार चुनौतियां अधिक हैं। पर यह दावा भी किया कि स्थिति को सामान्य बनाए रखा जाएगा।

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