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फ्लैटों का कब्जा दिलाने का खाका हुआ तैयार

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आशियाने की लड़ाई लड़ रहे खरीदारों को फौरी तौर पर राहत मिलने की उम्मीद दिखी है।
Author नोएडा | September 1, 2017 01:26 am
(File Pic)

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आशियाने की लड़ाई लड़ रहे खरीदारों को फौरी तौर पर राहत मिलने की उम्मीद दिखी है। खास तौर पर आम्रपाली और जेपी इंफ्राटेक की परियोजनाओं से जुड़े खरीदारों ने योगी सरकार की तरफ से बनी तीन मंत्रियों की कमेटी के समक्ष अपनी बात रखी। इसके बाद यह उम्मीद बंधी है। उधर, आम्रपाली के वाणिज्यिक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे खरीदारों की मांग का भी मंत्रियों की कमेटी ने संज्ञान लिया है। साथ ही बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। आम्रपाली के खरीदारों की शिकायत की एक प्रति मंत्री सुरेश खन्ना ने रख ली है। जबकि एक प्रति एसएसपी व एसपी सिटी को सौंपी है। बताया गया है कि खरीदारों को संबंधित थानों में फोन कर बुलाया जाएगा, जहां थाना प्रभारी खरीदारों की शिकायत सुनकर मामला दर्ज करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिल्डर और खरीदारों के बीच के गतिरोध को खत्म करने के लिए तीन मंत्री, सुरेश खन्ना, सतीश महाना और सुरेश राणा की कमेटी गठित की है। इन कमेटी ने पिछले दो दिनों में 200 से ज्यादा खरीदारों से मुलाकात कर उनका पक्ष सुना है। इसके अलावा बिल्डर कंपनियों और क्रेडाई ने भी बातचीत की गई है। गुरुवार शाम को सभी पक्षों से वार्ता करने के बाद बताया कि बिल्डर-खरीदार विवाद का व्यवहारिक हल निकालने की कोशिश की गई है। मुख्य रूप से आम्रपाली और जेपी बिल्डर कंपनियों के खरीदारों की परेशानी दूर करने की कोशिश की गई है। इसके तहत तय किया गया है कि आम्रपाली बिल्डर कंपनी को 40 हजार फ्लैट देने थे। इसके लिए तय किया गया है कि कंपनी की जो भी परियोजनाएं तकरीबन पूरा होने यानी कंप्लीशन के स्तर की हैं, उनके खरीदारों को कंप्लीशन (अधिभोग) मिलने तक कोई रकम नहीं देनी होगी। केवल रजिस्ट्री कराने से पहले बकाया रकम देनी होगी।

इसको पूरा होने के लिए 2 साल की समय सीमा तय की गई है। बताया गया है कि 99 फीसद खरीदार भी यहीं चाहते हैं। वहीं जेपी इंफ्राटेक के मामले में समूह ने बताया कि नवंबर से बिल्डर कंपनी हर महीने 600 फ्लैटों का कब्जा देगी। बाकी सभी शर्ते वही रहेंगी, जो आम्रपाली के साथ हैं। इसके अलावा यूनिटेक बिल्डर ने अपनी जमीन सरेंडर (वापस देने) की पेशकश की है। इसके लिए कानून विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है।

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