December 08, 2016

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अखिलेश यादव ने यादव सिंह को दी राहत, एक्सटेंशन मांगने पर न्यायिक जांच आयोग को किया भंग

यूपी सरकार ने पिछले साल फरवरी में यादव सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग अब तक तीन समयसीमा विस्तार ले चुका था।

Author November 3, 2016 09:45 am
अगस्त 2015 को सीबीआई ने 954.38 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के संबंध में यादव सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी नोयडा के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ न्यायिक जांच बंद करने के आदेश दिए हैं। एक सरकारी अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सीबीआई पहले ही यादव सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है इसलिए ये जांच रोक दी गई है। अधिकारी के अनुसार 26 अक्टूबर को सेवानिवृत्त जस्टिस अमर नाथ वर्मा के एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। सरकार ने ये फैसला तब लिया जब जांच आयोग ने 10 अगस्त तक जांच रिपोर्ट नहीं सौंप सका और उसने समयसीमा बढ़ाने की मांग की।

यादव सिंह पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए औद्योगिक इलाके में निर्माण के ठेके देकर आय से अधिक संपत्ति कमाने का आरोप है। माना जाता है कि समाजवादी परिवार में हुए हालिया झगड़े में भी इस मामले की अहम भूमिका रही थी। समाजवादी पार्टी के यूपी प्रमुख शिवपाल यादव ने अपने चचेरे भाई रामगोपाल यादव पर बीजेपी के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था क्योंकि राम गोपाल के बेटे और बहू पर यादव सिंह से सांठगांठ का आरोप है।

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यूपी सरकार ने पिछले साल फरवरी में जांच आयोग का गठन किया था। आयोग को छह महीने में अपनी रिपोर्ट देनी थी लेकिन आयोग समय रहते अपनी रिपोर्ट देने में विफल रहा। आयोग को इससे पहले तीन बार समयसीमा विस्तार मिल चुका था। तीसरा समयसीमा विस्तार 10 अगस्त को खत्म हुआ जिसके बाद आयोग ने चौथे समयसीमा विस्तार की मांग की थी। चौथे समयसीमा विस्तार की अर्जी ठुकराते हुए यूपी सरकार ने कहा कि यादव सिंह, उनकी पत्नी और अन्य सहयोगितों के खिलाफ सीबीआई आरोपपत्र दायर कर चुकी है इसलिए अब न्यायिक आयोग को समयसीमा विस्तार नहीं दिया जा रहा है। हालांकि इससे पहले एक बार यूपी सरकार यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच का इस आधार पर विरोध किया था उनकी न्यायिक जांच पहले से ही जारी है। जब लखनऊ हाईकोर्ट की इलाहाबाद पीठ ने यादव सिंह मामले में सीबाई जांच के आदेश दिए तो राज्य सरकार उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी लेकिन उच्चतम अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

इससे पहले सीबीआई जांच के बावजूद न्यायिक जांच जारी रखने का एक मामला हो चुका है। बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसकी जांच के लिए 16 दिसंबर 1992 को जस्टिस एमएस लिब्राहन के नेतृत्व में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। लिब्राहन आयोग को कई समयसीमा विस्तार मिले जिसके बाद आखिरकार 30 जून 2009 को आयोग ने अपनी रिपोर्ट पेश की। हालांकि सीबीआई ने मामले की जांच में अपना आरोपपत्र रायबेरली कोर्ट में मई 2003 में ही जमा कर दिया था।

यादव सिंह मामले की जांच कर रहे आयोग के एचजेएस(रिटायर्ड) ज्ञान चंद्र ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “मुझे फोन से बताया कि सरकार ने समयसीमा विस्तार देने से मना कर दिया है और इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। हालांकि मुझे अब तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है।”

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First Published on November 3, 2016 9:11 am

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