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देश के 65 फीसद बुजुर्ग वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं

देश के बुजुर्गो को उच्च धन-संपदा होने के बावजूद अभी भी चिकित्सकीय, सामाजिक और वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
Author नई दिल्ली | October 1, 2016 02:04 am
(Photo-agewellfoundation.org)

देश के बुजुर्गो को उच्च धन-संपदा होने के बावजूद अभी भी चिकित्सकीय, सामाजिक और वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐजवेल फाउंडेशन ने पूरे देश में बुजुर्गो की वित्तीय स्थिति, जरूरतों और बुजुर्गो के अधिकार संबंधी विभिन्न पहलुओं पर एक सर्वेक्षण आधारित अध्ययन किया। इस अध्ययन में 60 साल से ज्यादा उम्र के करीब 15,000 लोगों को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि पिछले दो दशकों के दौरान जमीन-जायजाद की कीमतें बढ़ने से बुजुर्गो की संपत्ति में बढ़ोतरी हुई। सर्वेक्षण में शामिल 46.4 फीसद बुजुर्गो ने माना कि इस बढ़ती उम्र में उनकी संपत्ति में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बुजुर्गो के प्रति संवेदनशील योजनाओं के अभाव से वे लोग अभी भी परेशानी में हैं। अध्ययन के निष्कषों के मुताबिक अधिक धन- संपत्ति के कारण उनकी खरीद क्षमता भी बढ़ गई है, लेकिन वे अपने विवेक से इसका इस्तेमान नहीं कर पाते, क्योंकि परिवार के युवा सदस्य अक्सर उनके निर्णयों को बदल देते हैं। इसमें कहा गया है, ‘देश की अर्थव्यवस्था में बुजुर्गो की सक्रिय भागीदारी और प्रमुख हैसियत के बावजूद भी उन्हें युवा पीढ़ी की तुलना में मामलूी उपभोक्ता ही समझा जाता है।

उनकी चिकित्सकीय एवं सामाजिक परेशानी का एक प्रमुख कारण यह भी है कि देश में बुजुर्गो के लिए संवेदनशील योजनाओं का अभाव है। अध्ययन में यह भी पाया गया है कि देश के आधे से अधिक बुजुर्ग अभी भी गांवों में रहते हैं और उन्हें वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे वे बुढ़ापे में दयनीय स्थिति में रहने को मजबूर हैं। अध्ययन में पाया गया कि देश के करीब 65 फीसद बुजुर्ग वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं और वे अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह से अपने परिजनों पर निर्भर हैं। इसमें कहा गया है, ‘इनमें से ज्यादातर बुजुर्ग अपनी आजीविका के लिए धनार्जन करने की स्थिति में नहीं हैं। उनकी बचत, यदि कुछ है, तो उनकी रोजाना की जरूरतों, विशेष तौर पर चिकित्सकीय खर्चो को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसमें यह भी पाया गया है कि केवल 35 प्रतिशत बुजुर्ग ही पेंशन के बजाय, जो उनकी आय का प्रमुख स्रोत होता है, अपनी बचत अथवा विरासत में मिली संपत्ति के कारण आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर हैं। हालांकि उनका परिवार अक्सर ‘अपनी असुरक्षा के कारण उनका शोषण’ करता है।

ऐजवेल फाउंडेशन के संस्थापक हिमांशु रथ ने कहा, ‘आर्थिक तौर पर असुरक्षित बुजुर्ग सामाजिक सुरक्षा चाहते हैं। मुफ्त का इलाज और रियायतें। इसलिए वह वृद्धावस्था में आरामदायक जीवन नहीं जी पाते। आर्थिक तौर पर सक्षम लोग खतरा-मुक्त योजनाओं में निवेश करते हैं, जिससे उन्हें बढ़ती उम्र में वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ठीक ठाक पूंजी मिल सके।’

इस अध्ययन में बुजुर्गो की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कदम उठाने की जरूरतों को भी रेखांकित किया गया है। इसमें कहा गया है कि बुजुर्गो को नई चिकित्सकीय सुरक्षा योजनाओं, लंबी अवधि के जीवन बीमा आदि में आवश्यक रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वे बढ़ती उम्र में अपनी चिकित्सकीय जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बन सकें।
मध्य प्रदेश के 69 वर्षीय प्रकाश पुरोहित ने कहा, ‘यह हमारे जीवन का सबसे मुश्किल समय है।

मैंने और मेरी पत्नी ने पूरी जिंदगी कृषि मजदूर के रूप में काम किया है। अब हमारे पास आय का कोई नियमित स्रोत नहीं है। सरकार की ओर से मामूली पेंशन मिलती है। हमारे बच्चे बड़े शहरों में रहते हैं और बहुत मुश्किल से ही आर्थिक मदद कर पाते हैं। गरीबी के कारण मैं अपनी पत्नी का ठीक से इलाज भी नहीं करा पाता।’

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First Published on October 1, 2016 2:03 am

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