ताज़ा खबर
 

कॉल ड्राप रोकने में कंपनियां नाकाम, ट्राई ने मांगा जुर्माने का अधिकार

कॉल ड्राप की बढ़ती समस्या के बीच भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सरकार से उसे मोबाइल आॅपरेटरों पर जुर्माना लगाने का अधिकार देने की मांग की है।
Author नई दिल्ली | June 2, 2016 01:28 am
मोबाइल टॉवर

कॉल ड्राप की बढ़ती समस्या के बीच भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सरकार से उसे मोबाइल आॅपरेटरों पर जुर्माना लगाने का अधिकार देने की मांग की है। कॉल ड्राप के मामले में ज्यादातर आॅपरेटर गुणवत्ता के बेंचमार्क पर नाकाम साबित हुए हैं। ट्राई ने 3 से 6 मई के दौरान दिल्ली में किए गए परीक्षण अभियान के नतीजे बुधवार को प्रकाशित किए। नियामक अगले 15 दिन में 12 और शहरों के नतीजे प्रकाशित करेगा।

ट्राई के सचिव सुधीर गुप्ता ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निष्कर्ष दिया है कि ट्राई के पास कॉल ड्राप के लिए आॅपरेटरों पर जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं है। हम दूरसंचार विभाग को पत्र लिख कर ट्राई कानून में संशोधन के लिए कहेंगे, जिससे हमें अधिक अधिकार मिल सकें।’

शीर्ष अदालत ने हाल में ट्राई के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें कॉल ड्राप के लिए आॅपरेटरों को उपभोक्ताआें को एक रुपए प्रति कॉल की दर से मुआवजा देने का प्रावधान किया गया था। एक ग्राहक को एक दिन में अधिकतम तीन रुपए तक का मुआवजा मिलना था। फिलहाल उपभोक्ताआें और दूरसंचार आॅपरेटरों के बीच विवाद के मामले उपभोक्ता अदालतें नहीं देखती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में अपने फैसले के जरिये उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत इस क्षेत्र के मामलों पर रोक लगाई हुई है। शीर्ष अदालत का कहना कि भारतीय टेलीग्राफ कानून के तहत इसके लिए विशेष राहत की व्यवस्था है।

दूरसंचार आॅपरेटरों का दावा है कि उन्होंने अतिरिक्त मोबाइल टावर लगाकर अपने नेटवर्क में सुधार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एयरटेल और एमटीएनएल के सभी 3जी नेटवर्क, 2जी नेटवर्क और आरकॉम के सीडीएमए नेटवर्क का प्रदर्शन पिछले परीक्षण से भी खराब हुआ है।’ ताजा परीक्षण में दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी एमटीएनएल सभी नेटवर्क आधारित गुणवत्ता मानदंडों पर नाकाम रही है। ट्राई ने कहा ‘एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस, एयरसेल और आइडिया को अपनी कॉल ड्राप दर और सुधारने की जरूरत है। सीडीएमए आॅपरेटरों और एमटीएनएल को सभी मानदंडों पर सुधार करने की जरूरत है।’

ट्राई की रिपोर्ट में कहा गया कि कॉल ड्राप दर के मामले में रिलायंस 2जी और वोडाफोन 3जी को छोड़ कर अन्य आपरेटर बेंचमार्क पर खरे नहीं उतर सके हैं। नियामक ने पाया कि एयरसेल कॉल ड्राप पर पर्दा डालने के लिए अपने समकक्षों की तुलना में रेडियो लिंक टाइम आउट प्रौद्योगिकी का अधिक इस्तेमाल कर रही है। रिपोर्ट कहती है, ‘ज्यादातर आॅपरेटरों ने अपने नेटवर्क प्रदर्शन में सुधार किया है। हालांकि, एयरसेल द्वारा आरएलटी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल अधिक
किया जा रहा है।’

ट्राई के सदस्य अनिल कौशल ने कहा कि आरएलटी का स्तर विचार-विमर्श का विषय है। विभाग की टर्म सेल इस मामले की जांच कर रही है। ट्राई ने अपने तिमाही परीक्षण अभियानों के नतीजे प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध वेबसाइट शुरू की है। इसके अलावा उसने अवांछित कॉल तथा एसएमएस के बारे में शिकायत प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन भी शुरू किया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.