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UP को मिली सारस की सलामती की कमान

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गांव के पास बनी सैफई हवाई पट्टी ने सारस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। यहां आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वैज्ञानिकों ने दावा किया कि सैफई के पास स्थित बंजराहार क्षेत्र में वेटलैंड (नम क्षेत्र) था, जो सारस के लिए माकूल था।
Author इटावा/ लखनऊ | February 5, 2016 09:56 am

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गांव के पास बनी सैफई हवाई पट्टी ने सारस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। यहां आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वैज्ञानिकों ने दावा किया कि सैफई के पास स्थित बंजराहार क्षेत्र में वेटलैंड (नम क्षेत्र) था, जो सारस के लिए माकूल था। लेकिन अब वहां हवाई पट्टी है। इसके अलावा मैनपुरी के समान व इटावा के सरसई नावर भी सारस के केंद्र हैं, जहां वेटलैंड का टोटा हो रहा है। संगोष्ठी के अंतिम सत्र में पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने यह निर्णय किया कि सारस को लेकर विश्व स्तर पर एक नेटवर्क तैयार किया जाए। इससे सारस को लेकर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकेगा ।

संगोष्ठी में कंबोडिया से आए शोधकर्ता वेंजेलिंग ने बताया कि उनके देश में सारसों की संख्या एक हजार से भी अधिक है। कंबोडिया में सारस आस्था का प्रतीक है। यहां के ऐतिहासिक मंदिरों में सारस के क्षेत्र मिलेंगे। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वैज्ञानिकों ने बताया कि सारस के लिए धान की दलदली जमीन सबसे मुफीद मानी जाती है। समान और सरसई नावर क्षेत्र में ऐसी दलदली जमीन है। ये खेत पूरी तरह वेटलैंड जैसे हो जाते हैं, इसलिए यहां सारस बसाए जा सकते हैं।

मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) रूपक डे ने बताया कि विश्व में एक लाख से ज्यादा वेटलैंड क्षेत्र हैं। दुनिया भर में 30 से 35 हजार सारस पाए जाते हैं जिनमें 20 से 25 हजार भारत में हैं। इनमें 14 हजार उत्तर प्रदेश में हैं। राज्य में विश्व के 40 फीसद सारस वास करते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि क्रेन विलुप्तप्राय पक्षियों में एक है। इनकी विश्व में पाई जाने वाली 15 में से 11 प्रजातियों के पक्षियों की संख्या निरंतर घट रही है। भारत में इसकी छह प्रजातियां हैं, जिसमें सारस सर्वाधिक लोकप्रिय है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इटावा और आसपास का क्षेत्र सारस की स्वभाविक राजधानी हैं। लेकिन अब यहां के वेटलैंड अतिक्रमण की वजह से कम हो गया है।

उत्तर प्रदेश में वेटलैंड (दलदली) क्षेत्र में काफी तेजी से गिरावट आई है। यहां पर दो तिहाई वेटलैंड क्षेत्र घट गया है। रिम्स सभागार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सारस संरक्षण संगोष्ठी में अपनी प्रस्तुति देते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्य वन्य जीव संरक्षक एम एहसान ने बताया कि 1998 में उत्तर प्रदेश में 70.07 हैक्टेयर क्षेत्रफल में वेटलैंड था जो अब घटकर 26.66 हैक्टेयर रह गया है। उन्होंने बताया कि वेटलैंड क्षेत्र का उपयोग कृषि व विकास के कार्यों में किया जा रहा है। इसके लिए हमें कार्ययोजना बनानी होगी। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे वेटलैंड खत्म हो रहे हैं जो सारस संरक्षण के लिए ठीक नहीं हैं। हालांकि प्रदेश में सूखे की स्थिति ने भी वेटलैंड पर प्रभाव डाला है। हम केवल नहरों के ऊपर ही वेटलैंड पर निर्भर हो गए।

दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन से पूर्व पैनल चर्चा में यह प्रस्ताव पास हुआ। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने सारस बेल्ट बनाकर सारसों की मौत का कारण बन रही रासायनिक खाद को प्रतिबंधित किए जाने व वेटलैंड पर लगातार हो रहे कब्जे को रोकने के लिए सरकारों को कड़े कानून बनाने का भी प्रस्ताव तैयार हुआ जो प्रदेश सरकार व विभिन्न देश व प्रदेशों की सरकारों के समक्ष रखा जाएगा ।

अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन समापन से पूर्व पैनल चर्चा के बाद देश-विदेश के विशेषज्ञों ने यह प्रस्ताव तैयार कर उस पर अपनी स्वीकृति दे दी। अब यह प्रस्ताव अखिलेश सरकार के सामने रखा जाएगा। साथ ही विभिन्न देशों की सरकार से भी प्रस्ताव पर कार्ययोजना बनाने के लिए सहयोग मांगा जाएगा। संगोष्ठी में जुटे नौ देशों के विशेषज्ञों ने माना है कि उनके देशों में इस तरह की संगोष्ठी संभव नहीं, जिसमें सिर्फ एक विभाग नहीं बल्कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल होकर सारस और वेटलैंड पर चिंतन करें। ऐसे में सभी ने उत्तर प्रदेश को सारस और वेटलैंड संरक्षण के लिए ग्लोबल लीडर बनाने पर सहमति जताते हुए प्रस्ताव को पास कर दिया।

विश्वस्तरीय कमान हाथ में आने के बाद वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव, रूपक डे ने अगले ही वर्ष से यूपी में सारस और वेटलैंड संरक्षण पर कार्ययोजना बनाकर इसे जिला व पंचायत स्तर पर लागू किए जाने की घोषणा की। संगोष्ठी में सारस संरक्षित क्षेत्रों में रासायनिक खाद के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध, वेटलैंड पर निरंतर हो रहे कब्जों को रोकने के प्रयास, क्षेत्रीय आम नागरिकों की टीम बनाकर सारस और वेटलैंड संरक्षण का कार्य शुरू करने पर सहमति बनी।

सारस की गणना का काम शुरू किए जाने और सारस के अंडों को संरक्षित करने आदि के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई। इस बाबत अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय क्रेन फाउंडेशन के साथ हुए समझौते को भी सार्वजनिक किया गया। इसमें सबसे अहम है कि अगले 10 वर्षों तक भारत, अमेरिका के साथ मिलकर सारस और वेटलैंड संरक्षण का कार्य करेगा। संगोष्ठी में शामिल टाटा समूह के डॉ समीर सिन्हा ने देश के साथ विदेशों में भी सारस संरक्षण पर सहयोग की घोषणा की।

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