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अस्पताल से मांगी जांच रिपोर्ट तो सूचना अधिकार कार्यकर्ता को दी धमकी

गुरुतेग बहादुर अस्पताल में आंख की रोशनी गवां चुके मरीजों के मामले में जांच रपट अभी तक नहीं जारी की गई है।
Author नई दिल्ली | April 22, 2017 01:58 am
गुरुतेग बहादुर अस्पताल में आंख की रोशनी गवां चुके मरीजों के मामले में जांच रपट अभी तक नहीं जारी की गई है।

गुरुतेग बहादुर अस्पताल में आंख की रोशनी गवां चुके मरीजों के मामले में जांच रपट अभी तक नहीं जारी की गई है। बल्कि इस बारे में छानबीन करने वाले एक सूचना अधिकार कार्यकर्ता ने इस मामले में अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पैट्रन फॉर पूअर पीपुल्स फाउंडेशन के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद उमर ने दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व अल्पसंख्यक आयोग सहित मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत दी है कि इस मामले में जानकारी मांगने पर अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें धमकी दी गई है।
गुरु तेगबहादुर अस्पताल में एक अप्रैल को सुई लगवाने के लिए आने वाले करीब 20-22 मरीजों की आंख की रोशनी चली गई। इनमें से एक महिला की कुछ ही दिनों में मौत भी हो चुकी है। रोशनी गवां चुके मरीजों का बाद में एम्स की मदद से जांच व इलाज किया गया लेकिन रोशनी पूरी तरह से आई नही है। इस मामले में गड़बड़ी कहां हुई अस्पताल पशसासन की ओर से इसकी जांच की समिति बना कर जांच शुरू करने की बात कही गई थी। हफ्ते भर बाद अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सुनील कुमार ने कहा था कि माक्रोबाइलॉजी लैब से जांच रपट मिल जाए तो पूरी रिपोर्ट जारी की जाएगी। शुरुआती जांच के हवाले से उन्होने इसे संक्रमण का मामला करार दिया था।

लेकिन इस बात को भी हुए 15 दिन से अधिक हो गए लेकिन अभी तक जांच रपट का कुछ पता नहीं चला। इस बीच नई सीमापुरी निवासी आरटीआइ कार्यकर्ता सैयद मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि उन्होंने जब इस बारे में मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है और अस्पताल में मंत्री के ओएसडी रहे डॉक्टर को गलत ढंग से हड्डी रोग विभाग में एसआर के तौर पर भर्ती किए जाने पर सवाल उठाया (जिस पर भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई जांच जारी है) तो उनको अस्पताल के चिकित्सा निदेशक के लैंडलाइन फोन से धमकी भरा फोन किया गया। जिसमें पुलिस के जरिए देख लिए जाने की बात कही गई है। उन्होंने आशंका जताई है कि यह धमकी भरा फोन उनको चिकित्सा निदेशक ने किया है। इसके साथ ही मोहम्मद उमर ने डर जाहिर किया है कि उन्हें नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने पत्र में कुछ दिन पहले अस्पताल चिकि त्सक डॉक्टर आरकेबी चौधरी की मौत का जिक्र भी किया है और आरोप लगाया है कि इनकी प्रताड़ना से तंग आकर ही डॉक्टर चौधरी ने भी खुदखुशी कर ली थी।

इस बाबत अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर सुनील कुमार ने कहा है कि जांच रपट अभी कुछ दिन बाद आएगी। उन्होंने दावा किया कि इसमें वक्त इसलिए लग रहा कि इसके हर पहलू की पड़ताल की जा रही है ताकि कोई दोषी छूट न जाए या निर्दोष न फंसे। आरटीआई कार्यकर्ता को धमकाने की बाबत उन्होंने कहा कि उनके कहने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। इस मामले में मानवाधिकार आयोग व उपराज्यपाल की ओर से भी जांच हो रही है। उन्होंने कहा कि धमकी भरे फोन की बाबत मुझे कुछ नहीं कहना है। अगर कोई शिकायत है तो पुलिस जांच करेगी।

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