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राष्ट्रपति चुनाव में ‘स्याही कांड’ का असर, मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री पहली बार करेंगे मतदान

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान चर्चा में आए स्याही कांड का असर राष्ट्रपति चुनाव में देखने को मिल रहा है।
Author चंडीगढ़ | July 16, 2017 10:52 am
राष्ट्रपति चुनाव में प्रयोग होने वाली मतदान पेटी के साथ गुरुवार को चंडीगढ़ स्थित विधानसभा पहुंची चुनाव आयोग की टीम।

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान चर्चा में आए स्याही कांड का असर राष्ट्रपति चुनाव में देखने को मिल रहा है। अतीत में हुए घटनाक्रम से सबक लेते हुए चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव में इस्तेमाल के लिए स्याही और पेन शुक्रवार को भेजे। राष्ट्रपति चुनाव में विधायक इसी स्याही और पेन का इस्तेमाल करेंगे। राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान 17 जुलाई को होगा। हरियाणा में पिछले साल राज्यसभा चुनाव की एक सीट के लिए हुए मतदान के दौरान विधायकों की ओर से पेन बदलने के बाद पूरे समीकरण बदल गए थे। इस वजह से भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा ने जीत हासिल की थी। यह देश में अपनी तरह का पहला घटनाक्रम था।

राज्यसभा चुनाव में स्याही कांड के बाद यह पहला चुनाव होने जा रहा है। इस वजह से चुनाव आयोग ने यह फैसला किया है।
विधानसभा परिसर में राष्ट्रपति चुनाव की अन्य सामग्री के साथ-साथ स्याही और पेन को स्ट्रांग रूम में रखवा दिया गया है। हरियाणा में राष्ट्रपति चुनाव के मतदान के लिए आइएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को सहायक चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश कैडर के आइएएस अनिल संत पर्यवेक्षक बनाए गए हैं। सहायक चुनाव अधिकारी ने शुक्रवार को मतदान से जुड़े कर्मचारियों की बैठक ली।

दूसरी तरफ हरियाणा के सभी सियासी दलों ने भी इस चुनाव को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। इनेलो ने राजग के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन किया है। इससे हरियाणा में आकंड़ों में बदलाव हो गया है। सूबे में इस समय 90 विधायक, 10 लोकसभा सांसद और पांच राज्यसभा सदस्य हैं। प्रत्येक राज्य की आबादी के आधार पर वहां के विधायकों और सांसदों के वोट की वैल्यू निर्धारित होती है। साल 1971 में हुई जनगणना के आंकड़ों को ही इस बार के राष्टÑपति चुनाव में वोट की वैल्यू का आधार बनाया गया है। इसके मुताबिक हरियाणा के एक विधायक के वोट की कीमत 112 और सांसद और राज्यसभा सदस्य के वोट की कीमत 708 है।

पुराना स्याही विवाद

हरियाणा में पिछले साल राज्यसभा की दो सीटें रिक्त हुई थीं। आंकड़ों के आधार पर एक सीट भाजपा तो एक सीट विपक्ष के खाते में जानी तय मानी जा रही थी।
वर्तमान में केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह डूमरखां का चुनाव तो सर्वसमति से हो गया जबकि दूसरी सीट पर इनेलो व कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार आरके आनंद के मुकाबले उद्योगपति सुभाष चंद्रा को भाजपा ने समर्थन दिया।
मतदान में एक निर्दलीय विधायक की ओर से कथित तौर पर वोट के लिए पेन बदलने से चुनाव के सभी समीकरण बदल गए। इस वजह से आरके आनंद को सुभाष चंद्रा के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री पहली बार करेंगे मतदान

राष्ट्रपति चुनाव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओपी धनखड़, सहकारिता मंत्री मुनीष ग्रोवर, खाद्य आपूर्ति मंत्री कर्ण देव कंबोज, उद्योग मंत्री विपुल गोयल, इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला, चरणजीत सिंह रोड़ी, राज्यसभा सांसद राजकुमार कश्यप और सुभाष चंद्रा पहली बार मतदान करेंगे।

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