ताज़ा खबर
 

तकनीक के शहर में संस्कृति की तान

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में पिछले दिनों गुरुग्राम उत्सव का आयोजन किया गया। इसका आयोजन नृत्य धारा और आश्रय ने किया था।
ओडिशी नृत्यांगना वाणी माधव

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में पिछले दिनों गुरुग्राम उत्सव का आयोजन किया गया। इसका आयोजन नृत्य धारा और आश्रय ने किया था। हरियाणा कला परिषद, संगीत नाटक अकादमी और संस्कृति मंत्रालय ने भी इस आयोजन को सहयोग दिया था। समारोह के आयोजन के बारे में ओडिशी नृत्यांगना वाणी माधव ने बताया कि हम हरियाणा और दिल्ली एनसीआर के लोगों को समकालीन भारतीय कला जगत से परिचय करवाना चाहते हैं। साथ ही इस आयोजन के जरिए गुरुग्राम को तकनीकी केंद्र के अलावा, सांस्कृतिक केंद्र भी बनाना चाहते हैं। ताकि, युवा भारतीय संस्कृति से परिचित हों और इसे अपनाएं। समारोह की पहली शाम ओडिशी नृत्यांगना वाणी माधव ने ओडिशी नृत्य पेश किया। इसके अलावा, संजीव भट्टाचार्य ने मणिपुरी नृत्य और दसभुजा समूह ने गोतिपुआ नृत्य प्रस्तुत किया। समारोह के दौरान सुधांशु सुतार ने स्पॉट पेंटिंग कैनवास पर किया। समारोह की दूसरी संध्या मोनालिसा शुभदर्शिनी ने ओडिशी, मीनू ठाकुर ने कुचिपुडी और इंटरनेशनल सेंटर आॅफ कथकलि ने कथकलि प्रस्तुत किया। लोक कलाकार चंदन सिंह और नगाड़ा पार्टी ने हरियाणवी लोकगीत और नृत्य पेश किया।
ओडिशी नृत्यांगना वाणी माधव और उनकी शिष्याओं ने ओडिशी नृत्य का आरंभ मंगलाचरण से किया। यह मंगलाचरण रचना ‘भजामि विंध्यवासिनी’ से किया। इसमें देवी पार्वती की वंदना के साथ लक्ष्मी, काली और सरस्वती की वंदना की गई थी। यह राग मालिका और ताल मालिका में निबद्ध थी। उनकी दूसरी पेशकश कलावती पल्लवी थी। यह राग कलावती और एक ताली में निबद्ध थी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन मोक्ष नृत्य से किया। यह राग भैरवी में निबद्ध थी। नृत्य वाणी माधव और उनकी शिष्याओं का नृत्य मोहक और सरस था। उन्होंने ओडिशी की बारीकियों को बहुत ही सम्मोहक तरीके से पेश किया।

समारोह की अगली शाम चंदन सिंह और पार्टी ने लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने स्वागत गीत ‘स्वागत है बारंबार आपका अभिनंदन सतबारी’ को गाया। इसमें मुख्य अतिथियों और आयोजकों के नाम का जिक्र बहुत रोचक था। उन्होंने लोकगीतों, ‘भारत में आओ फेरी भगत के मोहन कृष्ण मुरारीह्य, ह्यराम-राम सिर धारी रेह्य, ह्यमोहन खेलन आयो रे होली’ और ‘कान्हा गगरिया मत फोड़’ को सुरों में पिरोया। उनके समूह में किशोर नर्तक मोहित और वयोवृद्ध नर्तक राजेंद्र पंडित ने साधारण व दीपक लोकनृत्य पेश कर समां बांध दिया। राजूनाथ ने अपनी बीन की धुन से लोकगायन को मोहक बना दिया। समूह में शामिल अन्य कलाकार थे-दुलितचंद्र, बाबूराम, तेजराम, भूरा और नरेंद्र।

ओडिशी नृत्यांगना मोनालिसा शुभदर्शनी ने देवी वंदना पेश किया। यह राग भैरवी और एक व जती ताल में निबद्ध था। यह सुधांशु रंजन व चंद्रकांत की नृत्य रचना थी। देवी वंदना में उन्होंने महिषासुरमर्दिनी के रूप को विवेचित किया। मोनालिसा का आंगिक अभिनय ठीक-ठाक था, लेकिन, मुख व आंखों के भाव बहुत सहज नहीं थे। कुचिपुड़ी नृत्यांगना मीनू ठाकुर ने सरस्वती वंदना, त्रिलोकरक्षिणी और राधाकृष्ण लीला पेश किया। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की रचना ावर दे वीणा वादिनीस पर पहली पेशकश आधारित थी। यह अच्छी थी। दूसरी प्रस्तुति ‘त्रिलोकरक्षिणी’ की शुरुआत अच्छी थी। उन्होंने ‘करूणाकरं घृत पाशांकुशं’, ‘ए गिरि नंदिनी’ व शांति श्लोक आदि को नृत्य में पिरोया था। मीनू ठाकुर की शिष्याओं ने देवी और असुर के द्वंद्व को अच्छे तरीके से निरूपित किया। देवी और दैत्य के संघर्ष के बाद, शांति पाठ के बाद दोबारा से नृत्य को विस्तार देने से नृत्यरचना का रसभंग हो गया।

मीनू ठाकुर एक समझदार नृत्यांगना हैं, उनसे अपेक्षा रहती है। उनकी अगली पेशकश राधा कृष्ण लीला थी। यह केवल धुन पर आधारित थी, इसमें जतीस के बोल पिरोए गए नहीं थे। हालांकि, शिष्याओं ने संतुलित अंग व पद संचालन पेश किया। अगर, इसके संगीत पक्ष को और प्रभावी बनाया गया होता तो प्रस्तुति और आकर्षक बन पड़ती। मीनू के साथ शिरकत करने वालीं नृत्यांगनाएं थीं-निवेदिता, बबीता, स्वाति, सुप्रभा, गरिमा, नेहा, विदिशा व भावना। इसके अलावा, समारोह में कथकलि के कलाकारों ने ‘गीतोपदेशम’ पेश किया। महाभारत युद्ध के दौरान इसमें कृष्ण और अर्जुन के संवाद को कलाकारों ने दर्शाया। कलाभारती ने कृष्ण और सदानंद विष्णु ने अर्जुन की भूमिका को निभाया। दोनों कलाकारों ने बहुत ही कुशलता से अंग, मुख, आंख, गाल, गर्दन आदि की गतियों का प्रयोग किया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग