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मध्यप्रदेश में अगले तीन दशक में 1.5 डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान

अध्ययन में बताया गया है कि भारत वैश्विक समस्या में किस तरह उलझा हुआ है जो विकासशील और गरीब देशों के लिए भीषण खतरा है
Author अहमदाबाद | June 6, 2016 22:35 pm
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मध्यप्रदेश में तापमान वर्ष 2045 तक 1 से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इससे और अधिक सूखा पड़ेगा तथा कृषि, जल संसाधनों, अवसंरचना तथा ऊर्जा क्षेत्र पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। यह दावा ‘मध्यप्रदेश में जलवायु परिवर्तन : संकेतक, प्रभाव और संयोजन’ (क्लाइमेट चेंज इन मध्य प्रदेश : इन्डिकेटर्स, इम्पैक्ट्स एंड एडैप्टेशन) शीर्षक वाले एक अध्ययन में किया गया है।

आइआइटी गांधीनगर के संकाय सदस्य विमल मिश्रा और आइआइएम अहमदाबाद के अमित गर्ग द्वारा किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि तापमान में वृद्धि के साथ ही सूखा बार-बार और बहुत ज्यादा पड़ेगा। इस अध्ययन में कहा गया है कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के तहत तापमान में वृद्धि की वजह से मानसून सीजन के दौरान व्यापक एवं भीषण सूखा पड़ेगा। राज्य में गर्म दिन, गर्म रात और लू के थपेड़ों की बारंबारता बढ़ेगी।

अमित ने कहा कि तापमान में वृद्धि पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के अनुसार, 194 देशों द्वारा तय किए गए लक्ष्यों से बहुत अलग है। समझौते में सदी के अंत तक वैश्विक तापमान को पूर्व औद्योगिक स्तर से दो डिग्री सेल्सियस कम करने के लिए लक्ष्य रखा गया है। लेकिन यहां हम देख रहे हैं कि तापमान तेजी से लक्ष्य से आगे निकल रहा है जो चिंता का कारण है।

अध्ययन में बताया गया है कि भारत वैश्विक समस्या में किस तरह उलझा हुआ है जो विकासशील और गरीब देशों के लिए भीषण खतरा है, क्योंकि ऐसे देशों के पास जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए संसाधनों का अभाव है। समस्या मध्य प्रदेश ने पैदा नहीं की है लेकिन उसे इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

मिश्रा ने बताया कि हम अन्य राज्यों के लिए भी ऐसा अध्ययन कर सकते हैं। अलग-अलग राज्यों में जलवायु परिवर्तन का पूर्वानुमान अलग-अलग हो सकता है। लेकिन व्यापक पैमाने पर देखें तो यह चेतावनी है क्योंकि इसकी वजह से लू के थपेड़ों, गर्म दिन और गर्म रातों की समस्या आने वाले दिनों में बार-बार परेशान कर सकती है।

लेखकों ने दिसंबर में पूरे भारत पर किया गया एक अध्ययन प्रकाशित किया था जिसमें उन्होंने निष्कर्ष निकाला था कि वर्ष 2045 तक देशभर के तापमान में 1 डिग्री से 1.5 डिग्री तक की वृद्धि हो सकती है। तापमान में इस वृद्धि का कृषि और फसलों के उत्पादन पर गहरा असर पड़ सकता है। इसमें कहा गया कि भारत को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए अगले 15 साल में एक हजार अरब डॉलर से अधिक की जरूरत होगी।

अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन में वर्ष 1951 से 2014 तक हुई बारिश और तापमान के आंकड़ों का अवलोकन किया जो उन्होंने मौसम विभाग से लिए हैं। अध्ययन के अनुसार, मध्यप्रदेश में तापमान में वृद्धि होने पर वहां वर्ष 2016 से 2045 तक गर्मी में दो से तीन गुना और वर्ष 2045 से 2075 तक चार से छह गुना वृद्धि हो सकती है।

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