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तेलंगाना में बढ़ेगा सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े मुस्लिमों का आरक्षण, 4 की बजाय 12 फीसदी होगी सीमा

चंद्रशेखर राव ने कहा कि तेलंगाना, तमिलनाडु के माडल को अपना रहा है जहां विभिन्न समूहों को कुल 69 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव

तेलंगाना सरकार ने मुसलमानों के बीच के सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लिए आरक्षण की सीमा शनिवार को वर्तमान के चार फीसदी से बढ़ाकर बारह फीसदी करने का फैसला किया। यह फैसला राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने की। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट ने अनुसूचित जनजाति के लिए भी आरक्षण को वर्तमान के सात फीसदी से बढ़कार दस फीसदी कर दिया है। राज्य विधानमंडल के दोनों सदन रविवार को एक विशेष सत्र में मुसलमानों और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण बढ़ाने से संबंधित विधेयक को पारित करेंगे। आरक्षण में इस बढ़ोतरी के बाद राज्य में कुल आरक्षण निर्धारित पचास फीसदी से अधिक हो जाएगा। इसलिए विधायिका तेलंगाना आरक्षण विधेयक को पारित कर इसे इस आग्रह के साथ केंद्र के पास भेजेगी कि इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए, जैसा कि तमिलनाडु के मामले में किया गया था। चंद्रशेखर राव ने कहा कि तेलंगाना, तमिलनाडु के माडल को अपना रहा है जहां विभिन्न समूहों को कुल 69 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने पिछले विधानसभा चुनाव-2014 के दौरान मुस्लिमों के लिए नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण बढ़ाने का वादा किया था। टीआरएस ने वादा किया था कि राज्य में मुस्लिमों को मिल रहे चार फीसदी के आरक्षण को बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया जाएगा। टीआरएस ने अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण भी 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का वादा किया था। मुख्यमंत्री राव ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के पिछड़े वर्ग के लोगों पहले ही पिछड़ा वर्ग (ई) के तहत रखा गया है और उन्हें आरक्षण दिया गया है।

एक पूर्व आईएएस अधिकारी की अक्ष्यक्षता वाली समिति ने पिछले वर्ष राज्य में मुस्लिम समुदाय पर अध्ययन किया था और राज्य सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में मुस्लिमों को आरक्षण दिए जाने की सिफारिश की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग से भी एक और अध्ययन करने के लिए कहा। हालांकि राज्य सरकार के इस कदम का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यह कहकर विरोध किया कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण दिए जाने की बात नहीं कही गई है।

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