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रिजॉर्ट में ठहराए गए विधायकों ने कहा- पन्नीरसेल्वम खेमे ने दी थी जान से मारने की धमकी, इसलिए यहां इकट्ठा हैं

एआईएडीएमके के 129 विधायक बुधवार रात से रिजॉर्ट में रुके हुए हैं।
शशिकला के साथ ओ. पन्नीरसेल्वम। (File Photo)

पुलिस और रेवन्यू अधिकारियों की टीम ने गोल्डन बे बीच रिजॉर्ट में ठहराए गए 129 एआईएडीएमके विधायकों से पूछताछ की। बुधवार रात से रिजॉर्ट में ठहराए गए विधायकों से पुलिस और रेवन्यू अधिकारियों की टीम ने एक-एक करके सबसे अलग-अलग पूछताछ की। पूछताछ सुबह 6.30 बजे शुरु हुई जो कि 11.30 बजे तक चली। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मीडिया से बात करते हुए पूछताछ करने वाली टीम ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश के बाद सभी विधायकों से अलग-अलग पूछताछ की है।

टीम ने विधायकों से पूछा कि क्या उन्हें रिजॉर्ट में बंधक बनाया गया, परेशान किया गया है या फिर वे अपनी मर्जी से यहां ठहरे हुए हैं। पुलिस और रेवन्यू टीम ने विधायकों से लिखित में बयान लिए हैं। हर एक विधायक के लिखित बयान कोर्ट में सोमवार को जमा कराए जाएंगे। इसके बाद दो विधायक वी पन्नीरसेल्वम और के. मोहन ने पत्रकारों से बात की।

रिपोर्ट में विधायक पन्नीरसेल्वम के हवाले से लिखा गया है, ‘रिजॉर्ट में उनके साथ कोई जबरदस्ती नहीं गई है और ना ही उन्हें कोई धमकी नहीं दी गई। हम लोग अपनी मर्जी से रिजॉर्ट में रुके हुए हैं।’ जब उनसे पूछा गया कि वे विधायक होस्टल में क्यों नहीं रुके तो उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम खेमे से हमें जान से मारने की धमकी मिली थी। रिजॉर्ट में हम लोग अपनी सुरक्षा के लिए रुके हुए हैं।’

साथ ही दावा किया कि पन्नीरसेल्वम कभी भी पार्टी के लिए वफादार नहीं रहे। उन्होंने कहा, ‘हमारा कोई अपहरण नहीं किया गया। अपहरण तो पन्नीरसेल्वम का डीएमके ने किया है। जैसे ही राज्यपाल बुलाएंगे सरकार शशिकला ही बनाएंगी।’ वहीं विधायक मोहन ने कहा कि शशिकला के अलावा कोई नहीं है जो पार्टी का नेतृत्व कर सकें और सरकार चला सकें।

बता दें, शशिकला ने उनका समर्थन करने वाले विधायकों की राज्यपाल के सामने परेड कराने के लिए सी विद्यासागर राव से समय मांगा है। शशिकला ने कहा कि उनका मानना है कि राज्यपाल संविधान की प्रभुसत्ता, लोकतंत्र और तमिलनाडु के हित को बचाने के लिए तुरंत कार्रवाई करेंगे। राज्यपाल को लिखे पत्र में शशिकला ने कहा कि वह नौ फरवरी को उनसे अपने वरिष्ठ मंत्रियों से मिलीं थीं और उन्होंने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा ताकि वह उन्हें उनको अपना नेता चुनने वाले पार्टी विधायकों का एक पत्र सौंप सकें।

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