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जाकिर नाईक के पास 100 करोड़ की जायदाद, रीयल एस्टेट में है भारी निवेश

एनआइए ने जांच के सिलसिले में नाईक की बहन नैलाह नौशाद नूरानी समेत उनके 20 सहयोगियों से पूछताछ की है। सूत्र ने कहा कि हमने आयकर रिटर्न व अन्य चीजों समेत कुछ दस्तावेज मांगे हैं।
Author नई दिल्ली | January 20, 2017 01:53 am
विवादित धर्मगुरु जाकिर नाईक। (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय जांच एजंसी (एनआइए) विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक से पूछताछ कर सकती है। एजंसी नाईक के 78 बैंक खातों, मुंबई और उसके आसपास रीयल एस्टेट में उनके और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए कम से कम 100 करोड़ रुपए के निवेश की छानबीन कर रही है। एनआइए सूत्रों ने बताया कि जांच एजंसी ने धर्म के आधार पर विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने, सद्भाव के विरुद्ध हरकतें करने के आरोप में पिछले साल नाईक और अन्य के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया था और अब उसे इन उपदेशक से जुड़े व्यक्तियों व कॉरपोरेट निगमों समेत 23 निकायों की भूमिका मिली है।

सूत्रों के अनुसार एनआइए ने जांच के सिलसिले में नाईक की बहन नैलाह नौशाद नूरानी समेत उनके 20 सहयोगियों से पूछताछ की है। सूत्र ने कहा कि हमने आयकर रिटर्न व अन्य चीजों समेत कुछ दस्तावेज मांगे हैं। इसके अलावा, देश के विभिन्न बैंकों में 78 खाते भी खंगाले जा रहे हैं। यह पूरा हो जाने के बाद हम पूछताछ के लिए नाईक को बुलाना चाहते हैं। एनआइए सूत्रों ने बताया कि जांच एजंसी ने बैंकों से लेनदेन समेत इन खातों का ब्योरा मांगा है। दरअसल नाईक और उनके साथियों ने मुंबई और उसके आसपास रीयल एस्टेट में कम से कम 100 करोड़ रुपए का निवेश किया है। सूत्रों ने बताया कि एजंसी के अधिकारियों को इस मामले में शामिल व्यक्तियों द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन में धन के जटिल अंतरण का पता चला है। एनआइए धार्मिक और उपदेशक वीडियो के निर्माण में लगी मुंबई की हॉरमनी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की भी छानबीन कर रही है।

नाईक के गैरसरकारी संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आइआरएफ) को केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कर दिया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए फिलहाल देश से बाहर चल रहे नाईक के भाषणों पर ब्रिटेन, कनाडा और मलेशिया में रोक लगा दी गई है। गृह मंत्रालय ने पाया है कि इस एनजीओ का इंटनेशनल इस्लामिक चैनल पीस टीवी के साथ संदेहास्पद संबंध है। पीस टीवी पर आतंकवाद का प्रसार करने का आरोप है। गृह मंत्रालय के मुताबिक आइआरएफ के प्रमुख नाईक ने कथित रूप से कई भड़काऊ भाषण दिए और कथित रूप से आतंकवाद के प्रचार में शामिल हैं।आइआरएफ तब विभिन्न सुरक्षा एजंसियों की नजर में आया जब पिछले साल एक जुलाई के ढाका कैफे हमले में शामिल एक आतंकवादी ने कथित रूप से सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि उसे नाईक के उपदेशों से प्रेरणा मिली थी। इसके अलावा, वर्ष 2016 में इस्लामिक स्टेट में शामिल होने गए मुंबई के उपनगरीय इलाके के कुछ युवाओं ने भी कथित तौर पर कहा था कि उन्हें इन उपदेशक से प्रेरणा मिली है।

महाराष्ट्र पुलिस ने भी युवकों को कट्टरपंथ की घूंट पिलाने और उन्हें आतंकवादी गतिविधियों के प्रति आकर्षित करने में कथित रूप से शामिल रहने को लेकर नाईक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। सूत्रों ने बताया कि नाईक ने आपत्तिजनक कार्यक्रम तैयार करने के लिए आइआरएफ का विदेशी चंदा पीस टीवी में अंतरित किया। ज्यादातर कार्यक्रमों, जो भारत में तैयार किए गए, में नाईक के कथित रूप से नफरत वाले भाषण हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने भी नाईक और आइआरएफ के खिलाफ धनशोधन कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है।

 

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