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कावेरी जल विवाद: राज्य के दोनों प्रमुख दलों ने तमिलनाडु को ‘धोखा देने’ पर BJP सरकार की निंदा की

कांग्रेस और भाजपा कर्नाटक में सत्ता हासिल करने में लगे हैं और उन्हें तमिलनाडु के किसानों की चिंता नहीं है।
Author चेन्नई | October 4, 2016 07:09 am
कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कर्नाटक बंद के दौरान कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया। (PTI Photo by Shailendra Bhojak/ 9 Sep, 2016)

तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने सोमवार केंद्र पर आरोप लगाया कि कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन के लिए उसे निर्देश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश में संशोधन का अनुरोध कर उसने तमिलनाडु से धोखा किया है। सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक और विपक्षी द्रमुक ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने 2018 में प्रस्तावित कर्नाटक विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। अन्नाद्रमुक की प्रवक्ता सीआर सरस्वती ने कहा कि यह साफ नहीं है कि इससे पहले बोर्ड का गठन करने का आश्वासन देने वाले केंद्र ने सोमवार सुप्रीम कोर्ट में यह अनुरोध क्यों किया।

उन्होंने सवाल किया कि आमतौर पर कर्नाटक ने कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु से धोखा किया लेकिन अब यह केन्द्र क्यों कर रहा है? उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘यह जनता का मुद्दा है। राजनीति की क्या जरूरत है? कांग्रेस और भाजपा कर्नाटक में सत्ता हासिल करने में लगे हैं और उन्हें तमिलनाडु के किसानों की चिंता नहीं है।’ उन्होंने कहा कि केवल बोर्ड का गठन ही इस मुद्दे का अच्छा समाधान सुनिश्चित करेगा।प्रवक्ता ने कहा कि बोर्ड के गठन की मांग नई नहीं है और राज्य सरकार ने 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से यह मांग की है। द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि ने कहा कि केंद्र ने भारतीय न्याय प्रणाली का अपमान किया है और शीर्ष अदालत में इस तरह की अपील कर उन्होंने तमिलों के साथ विश्वासघात किया है।

इस संबंध में चर्चा के लिए करुणानिधि ने राज्य सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने और राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, ‘कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ही केंद्र (भाजपा) में सत्तासीन लोगों ने अचानक, पक्षपातपूर्ण निर्णय किया। वह (केंद्र) पूरी तरह से कर्नाटक की आवाज उठा रहे हैं। यह निंदनीय है।’उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में अपने पांव जमाने में असफल रहने पर भाजपा ने कर्नाटक चुनाव में जीत की उम्मीद के चलते इस तरह के कदम का सहारा लिया है। उन्होंने कहा, ‘यह भारतीय न्याय प्रणाली का अपमान और तमिलों के साथ विश्वासघात है। कावेरी मुद्दे पर केंद्रीय कैबिनेट में केंद्र केवल कर्नाटक के मंत्रियों के बयानों को दोहरा रहा है।’

एमडीएमके संस्थापक वाइको ने तमिलनाडु को धोखा देने के लिए केंद्र पर निशाना साधा। माकपा के राज्य सचिव जी रामकृष्णन ने कहा कि बोर्ड का मुद्दा नया नहीं है और सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस संबंध में कावेरी विवाद निपटारा न्यायाधिकरण के फैसले को सिर्फ लागू करने को कहा है।
शीर्ष अदालत का रुख करते हुए सोमवार केंद्र ने अदालत से उसके पहले के फैसले में बदलाव की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केंद्र से मंगलवार तक बोर्ड के गठन का आदेश दिया था।

 

 

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