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अन्नाद्रमुक ने किया शशिकला को बाहर

इस बहुप्रतीक्षित बैठक में शशिकला की ओर से 15 फरवरी से पहले की गई सभी नियुक्तियों और बर्खास्तगी को भी अवैध घोषित कर दिया गया।
Author चेन्नई | September 13, 2017 07:29 am
शशिकला आय से अधिक संपत्ति के मामले में सजा काट रही हैं। (Illustration by Manali Ghosh)

अन्नाद्रमुक की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई ने मंगलवार को जेल में बंद पार्टी की अंतरिम महासचिव वीके शशिकला को बाहर का रास्ता दिखाते हुए उन्हें सभी पदों से हटा दिया। साथ ही उनकी ओर से की गई सभी नियुक्तियों को अवैध घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, पार्टी की महापरिषद ने अपनी बैठक में प्रस्ताव पारित कर महासचिव पद को भी खत्म कर दिया। इस बहुप्रतीक्षित बैठक में शशिकला की ओर से 15 फरवरी से पहले की गई सभी नियुक्तियों और बर्खास्तगी को भी अवैध घोषित कर दिया गया। शशिकला ने भ्रष्टाचार के एक मामले में 15 फरवरी को बंगलुरु की अदालत में आत्मसमर्पण किया था। महापरिषद की ओर से शशिकला की तरफ से की गई सभी नियुक्तियों को अवैध घोषित किए जाने के बाद उनके रिश्तेदार दिनाकरण की नियुक्ति स्वत: ही अवैध हो गई।

पार्टी सुप्रीमो और तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद हुई पार्टी की बैठक में 29 दिसंबर बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
को शशिकला को पार्टी का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया था। लेकिन नियुक्ति के एक दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति रखने के मामले में उन्हें और दो अन्य लोगों को दोषी करार दिया था। फैसले के बाद शशिकला ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। वह 15 फरवरी से बंगलुरु की केंद्रीय जेल में बंद हैं।बैठक में पार्टी का कामकाज चलाने के लिए प्रशासनिक अधिकारों से संपन्न दो नए पदों संयोजक व संयुक्त संयोजक का सृजन किया गया। इन दोनों पदों के लिए चुनाव होने तक मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम क्रम से संयोजक व संयुक्त संयोजक के पद पर रहेंगे।

यह बैठक मद्रास हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद हुई है। अदालत ने बैठक पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। जयललिता की मृत्यु के बाद हुई परिषद की दूसरी बैठक में कहा गया कि अम्मा (जयललिता) की अचानक मृत्यु के सदमे और चिंताओं के बीच पार्टी का कामकाज देखने के लिए वीके शशिकला को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया था। उसने कहा कि यह बैठक 29 दिसंबर, 2016 को हुई उनकी नियुक्ति को रद्द करने का फैसला आम सहमति से करती है। यह भी तय किया जाता है कि 30 दिसंबर, 2016 से लेकर 15 फरवरी, 2017 के बीच उनके द्वारा की गई सभी नियुक्तियां वैध नहीं हैं।

पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व वाले धड़ों के 21 अगस्त को हुए विलय के बाद एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा था कि शशिकला को पार्टी के शीर्ष पद से हटाने के लिए कदम उठाया जाएगा। पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व वाले बागी धड़े की मुख्य मांगों में शशिकला को हटाया जाना शामिल था। बैठक ने यह भी तय किया कि दिनाकरण की ओर से की गई नियुक्तियां और अन्य बदलाव भी वैध नहीं हैं और वह पार्टी कानून के तहत स्वीकार्य नहीं हैं।
महासचिव पद खत्म करने के साथ ही पार्टी ने जयललिता को अपना स्थायी महासचिव घोषित किया है। महासभा ने कहा कि जयललिता और पार्टी के संस्थापक एमजी रामचंद्रन की मृत्यु से उत्पन्न शून्य को कोई नहीं भर सकता। ई मधुसूदन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने भाग लिया।

 

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