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रजनीकांत की पत्‍नी के स्‍कूल पर मालिक ने जड़ा ताला, दो करोड़ किराया हो गया था बकाया

आश्रम मैट्रीकुलेशन स्कूल ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है वि स्कूल प्रशासन मकान मालिक पर मुकदमा करेगा।
रजनीकांत की पत्नी लता रजनीकांत (फाइल फोटो)

सुपरस्टार रजनीकांत की पत्नी लता रजनीकांत द्वारा चलाये जा रहे एक स्कूल पर ताला जड़ दिया गया है। दरअसल ये स्कूल एक किराये के घर में चल रहा था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक कई महीनों से स्कूल का किराया नहीं दिया गया था और किराये की रकम बढ़कर 2 करोड़ रुपये हो गई थी। आखिरकार किराया ना मिलने पर मकान मालिक ने ये कदम उठाया। लेकिन आश्रम मैट्रीकुलेशन स्कूल ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है वि स्कूल प्रशासन मकान मालिक पर मुकदमा करेगा। स्कूल प्रबंधन ने एक बयान जारी कर कहा, ‘मकान मालिक ने कानून को अपने हाथ में लिया है, उनलोगों ने बिना कोई सूचना दिये स्कूल में ताला जड़ दिया, मकान मालिक की वजह से स्कूल प्रबंधन, बच्चों और अभिभावकों गहरा चोट पहुंचा है। स्कूल प्रबंधन ने कहा है कि अब उन लोगों ने इस बिल्डिंग को खाली करने का फैसला लिया है। 300 छात्रों वाले इस स्कूल को फिलहाल दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया है।

बता दें कि ये विवाद तब सामने आया है जब सुपरस्टार रजनीकांत के राजनीतिक पारी की शुरुआत की खबरें मीडिया में आ रही है। हाल ही में रजनीकांत डीएमके के एक कार्यक्रम में पार्टी नेता स्टालिन के साथ मंच पर नजर आए थे। बता दें कि इस साल मई से ही रजनीकांत के राजनीति में आने की अटकलें लगाई जा रही हैं, मई में ही रजनीकांत ने कहा था, ‘अगर भगवान ने चाहा तो मैं जल्द ही राजनीति में आऊंगा।’ आश्रम स्कूल प्रबंधन के मुताबिक स्कूल बिल्डिंग का किराया अनावश्यक रुप से बढ़ा दिया गया था और विद्यालय प्रबंधन पर कई आरोप लगाये जा रहे थे। स्कूल प्रबंधन ने कहा, ‘ये सिर्फ स्कूल किराया का मामला नहीं है, ये उनके द्वारा किये जा रहे शोषण का मुद्दा है, वे लोग अनुचित और अत्यधिक किराया बढ़ा रहे हैं, इस बावत हमलोग बिल्डिंग मालिक से बात कर रहे हैं।

बता रहे हैं कि इस स्कूल को साल 1996 में सरकार ने मान्यता दी थी। लेकिन 2011 में इस स्कूल के वजूद पर तब संकट आ गया जब मकान मालिक ने कोर्ट से फरियाद कर स्कूल को खाली कराने की मांग की। स्कूल की समस्या तब और बढ़ गई जब राज्य सरकार ने नियम बना दिया कि किसी भी स्कूल को मान्यता देने के लिए उसके पास 30 साल का लीज होना अनिवार्य है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि 2 साल बाद स्कूल मालिक ने फिर से किराये की रकम बढ़ा दी, बाद में स्कूल ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। पिछले साल दिसंबर में भी स्कूल के बस ड्राइवरों को तनख्वाह नहीं मिली थी। तब स्कूल के पदाधिकारियों ने कहा कि नोटबंदी की वजह से कैश ना मिल पाने के कारण सैलरी नहीं दी जा पा रही है।

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