ताज़ा खबर
 

सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के वक़्त खड़ा नहीं होने पर हिंसा, दो लड़कियों सहित तीन को पीटा

मारपीट बहस के बाद हुई। आरोपी ने कहा कि जब राष्ट्रगान बजाया जा रहा था तब वो लोग सेल्फी ले रहे थे।
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

चेन्नई शहर के एक थिएटर में रविवार शाम उस समय महौल गर्मा गया जब राष्ट्रगान के अपमान के आरोप में एक युवक और दो लड़कियों के साथ मारपीट की गई। जानकारी के मुताबिक, रविवार को ‘चेन्नई 28-II’ फिल्म से पहले चलाए गए राष्ट्रगान के समय कुछ लोग सम्मान में खड़े नहीं हुए थे। इसके बाद दो गुटों में बहस शुरू हो गई और मारपीट होने लगी। इसमें 20 लोगों के एक ग्रुप ने दो लड़कियों और एक युवक को बुरी तरह पीट दिया। चेन्नई के अशोक नगर स्थित काशी थिएटर में यह लोग शो देखने गए थे और मारपीट इंटरवल के दौरान हुई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि राष्ट्रगान के दौरान ऐसे नौ लोग थे जो खड़े नहीं हुए थे।

जानकारी के मुताबिक, एक फ्रीलांस मूवी रिव्यू करने वाले विजी फिल्म देखने गए थे, लेकिन वह राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं हुए। इंटरवल में विजयकुमार नाम के व्यक्ति ने विजी का गिरेबान पकड़ के पूछा कि वह क्यों खड़ा नहीं हुआ था। इसके बाद बहस हुई जो मारपीट में बदल गई। 20 लोगों के एक ग्रुप ने विजी और दो अन्य महिलाओं सबरीता और शरीला की पिटाई की। कानून की पढ़ाई कर रहीं शरीला ने कहा, “हमें प्रताड़ित किया गया और मारपीट की गई। उन्होंने हमें जान से मारने की घमकी भी दी। हमारे उद्देश्य राष्ट्रगान का अपमान करना नहीं था।” वहीं, सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे विजयकुमार ने कहा, “जब राष्ट्रगान बजाया जा रहा था तब वो लोग सेल्फी ले रहे थे। इस बात का बुरा सिर्फ मुझे ही नहीं, दूसरे कई लोगों को लगा।”

गौरतलब है कि 30 नवंबर को राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश दिया था। आदेश में कहा गया था कि सभी सिनेमा घरों में फिल्म के शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलवाना होगा। इसके अलावा राष्ट्रगान के वक्त स्क्रीन पर तिरंगा भी दिखाना होगा। इसके अलावा कोर्ट ने कहा था कि हॉल में मौजूद दर्शकों को इस दौरान खड़ा होना भी अनिवार्य है। राष्ट्रगान बजाने की जनहित याचिका श्याम नारायण चौकसे नाम के शख्स ने डाली थी।

चर्चा: फिल्म से पहले सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. Sidheswar Misra
    Dec 12, 2016 at 6:49 am
    जो डर था वही हुवा .अंध राष्ट्वाद से न्याय पालिका भी अछूती नहीं रही . इस घटना का दोष माननीय पर जाता है अपील करने वाला तो शरारती था उसका उधेश्य पूरा हुवा .
    (0)(0)
    Reply
    1. Sidharth Goutam
      Dec 12, 2016 at 1:20 pm
      नहीं खड़ा होकर आप क्या साबित करना चाहते हो? ये तो अंध बौद्धिकता की हद गई?
      (0)(0)
      Reply
      1. D
        DHANRAJ C.
        Dec 12, 2016 at 7:18 am
        चीफ जज महोदय का रोना-धोना,बार-बार केंद्र सरकार पर चीखना,अपने आप को न्यायपालिका का तारणहार साबित करने की कोशिश करना और अब ये राष्ट्र-गान का आदेश ! अभी किस मुह से कहोगे की सरकार देशभक्ति के नाम पर अति कर रही है ? क्या SUPREAME कोर्ट ने राष्ट्र-गान को हर सिनेमा घर के हर शो के पहले बजाने ,मौजूद लोगो के सम्मान में खड़े रहने के आदेश से राष्ट्र-गान का सम्मान बढ़ाया है ?
        (0)(0)
        Reply