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‘कावेरी संकट से प्रति वर्ष एक हज़ार से ढाई हज़ार करोड़ रुपए का नुकसान’

किसानों ने टीम को धान के सूखे खेत और सूखी फसलें दिखाईं और कहा कि कर्नाटक को उनकी जरूरतों के लिए तुरंत और पानी छोड़ना चाहिए।
Author नागपत्तनम (तमिलनाडु) | October 11, 2016 03:53 am
तमिलनाडु को कावेरी नदी का जल दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ कर्नाटक के चिकमागलुर में मगादी के नजदीक एक सूखे झील में प्रदर्शन करते कन्नड़ सेना के कार्यकर्ता। (PTI Photo/21 Sep, 2016/File)

कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने उच्चतम न्यायालय की तरफ से गठित उच्चस्तरीय तकनीकी समिति को सोमवार (10 अक्टूबर) को बताया कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी विवाद के कारण उन्हें प्रति वर्ष करीब एक हजार करोड़ से लेकर ढाई हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। दोनों राज्यों के कावेरी बेसिन में स्थिति का आकलन करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने टीम का गठन किया था। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष जी. एस. झा की अध्यक्षता वाली टीम ने जिले में करूनकन्नी, किल्लुकुडी और किलवेलुर गांवों का आज दौरा किया। नागपत्तनम के जिलाधिकारी एस. पझानीसामी और अन्य अधिकारी भी दल के साथ मौजूद थे।

किसानों ने टीम को धान के सूखे खेत और सूखी फसलें दिखाईं और कहा कि कर्नाटक को उनकी जरूरतों के लिए तुरंत और पानी छोड़ना चाहिए। झा ने बाद में करूनकन्नी में संवाददाताओं से कहा कि समिति 17 अक्तूबर से पहले जमीनी हकीकत पर रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को सौंपेगी। डेल्टा जिलों के फेडरेशन ऑफ फार्मर्स एसोसिएशन के महासचिव अरुपति कल्याणम ने समिति को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि मेट्टूर बांध को 20 सितम्बर को सिंचाई के लिए खोला गया था लेकिन अंतिम छोर के अधिकतर इलाकों को अभी तक पानी नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ‘परिणामस्वरूप किसान धान की खेतों की भी सिंचाई नहीं कर पाए हैं।’

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