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कावेरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विवाद तेज, किसानों ने जाम किया बंगलुरु-मैसूरू राजमार्ग

तमिलनाडु ने अपनी याचिका में कर्नाटक को यह निर्देश देने की मांग की थी कि 40 हजार एकड़ क्षेत्र में लगी सांबा की फसल के लिए वह कावेरी नदी से 50.52 टीएमसी फुट पानी छोड़े।
Author मांड्या/चेन्नई | September 7, 2016 04:25 am
प्रदर्शनकारियों ने कई जगह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के पुतले फूंके।

तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कर्नाटक में आंदोलन तेज हो गया है। राज्य के किसानों और कन्नड समर्थक संगठनों ने मंगलवार को बंगलुरु-मैसूरू राजमार्ग जाम किया और बंद रखा। वहीं तमिलनाडु के मुख्य विपक्षी दल द्रमुक ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक से कावेरी नदी से जितना पानी छोड़ने को कहा है वह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्रदेश से अगले कदम के बारे में पूछा।  तमिलनाडु की याचिका पर अपने अंतरिम आदेश में न्यायालय ने नदी के बहाव के ऊपरी हिस्से में स्थित राज्य (कर्नाटक) को अगले दस दिन तक प्रतिदिन 15 हजार क्यूसेक पानी अपने पड़ोसी राज्य (तमिलनाडु) के लिए छोड़ने का निर्देश दिया था। तमिलनाडु ने अपनी याचिका में कर्नाटक को यह निर्देश देने की मांग की थी कि 40 हजार एकड़ क्षेत्र में लगी सांबा की फसल के लिए वह कावेरी नदी से 50.52 टीएमसी फुट पानी छोड़े।

शीर्ष अदालत के इस निर्देश के बाद कावेरी पर विवाद गरमा गया। इसके विरोध में कावेरी राजनीतिके केंद्र मांड्या जिले में बंद रहा। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह सड़कें जाम कर दीं और धरना दिया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कावेरी क्षेत्र में केंद्रीय बल समेत राज्य पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। इसे देखते हुए नौ सितंबर तक कृष्णराज सागर बांध के इर्द-गिर्द निषेधाज्ञा लगा दी गई। वहां आगंतुकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पुलिस ने बताया कि मांड्या में प्रदर्शनकारियों ने अनेक सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़ कर उन्हें बंद कराया। दुकानें, होटल और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहे। जिले में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी गई। सड़कों पर सरकारी और निजी बसें नजर नहीं आईं। मैसूरू और हासन  जिले में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि कर्नाटक कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु को न दे। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के पुतले फूंके।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने वरिष्ठ मंत्रियों, कानूनी विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ बैठकें की। उन्होंने रणनीति बनाने के लिए विधानमंडल के नेताओं और सांसदों की बैठक भी बुलाई है।  वहीं तमिलनाडु में विपक्षी दल द्रमुक ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी नदी से जितना पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, वह पर्याप्त नहीं है। द्रमुक ने सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक से यह बताने को कहा कि इस मुद्दे पर उसका अगला कदम क्या होगा। शीर्ष न्यायालय के सोमवार के आदेश पर द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिन तक 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया है लेकिन सांबा की फसल के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा।’

करुणानिधि ने बताया कि राज्य के विभिन्न किसान संगठनों ने जल की मात्रा को लेकर चिंता जताई थी। उनकी मांग की थी कि राज्य सरकार अतिरिक्त पानी की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर करे। करुणानिधि ने पूछा, ‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक तमिलनाडु के लिए केवल 13 टीएमसी फुट पानी उपलब्ध होगा। लेकिन 25 लाख एकड़ में लगी फसल के लिए 200 टीएमसी फुट पानी की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के तुरंत बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को सर्वदलीय बैठक की घोषणा कर दी जबकि तमिलनाडु सरकार ने यह साफ स्पष्ट नहीं किया है कि अब उसका अगला कदम क्या होगा। सरकार अब इस पर क्या फैसला लेगी? क्या वे पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे जैसा कि किसान संगठन मांग कर रहे हैं या फिर केंद्र की ओर से कावेरी प्रबंधन बोर्ड और कावेरी नियमन समिति के गठन का कड़ा आदेश दिलवा पाएंगे?’ उन्होंने कहा कि हर कोई अन्नाद्रमुक सरकार का जवाब जानने के लिए बेताब है।

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