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बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव ने बताया भगवा पार्टी का नया मंत्र, कहा- हमें गाय का दूध चाहिए, गोमांस नहीं

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव ने डीएमके पर हर मुद्दे पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश पर स्टालिन की ओर से उठाया गया सवाल डीएमके की कार्य पद्धति को दर्शाता है।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (Representative Image)

केंद्र सरकार की ओर से वध के लिए पशुओं की ब्रिकी पर बैन लगाए जाने का फैसले का लगातार विरोध हो रहा है। पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में सरकार के इस आदेश की राजनीतिक दलों ने आलोचना की। विरोधी दल बीजेपी पर गाय के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव ने डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन पर निशाना साधते हुए कहा, “स्टालिन को गोमांस चाहिए लेकिन हमें गाय का दूध चाहिए। यह भगवा पार्टी का नया मंत्र हैं। बता दें कि पशु ब्रिक्री बैन को लेकर स्टालिन ने बीजेपी पर निशाना साधा था।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई पहुंचे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव ने डीएमके पर हर मुद्दे पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश पर स्टालिन की ओर से उठाया गया सवाल डीएमके की कार्य पद्धति को दर्शाता है। बीजेपी नेता ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही शराब की दुकानों को लेकर कहा, “तमिलनाडु Tasmac Nadu बन गया है। राज्य को गाय का दूध चाहिए शराब नहीं। इस बात को समझते हुए राज्य सरकार पर शराब की दुकानें बंद करने के लिए जरुरी कदम उठाने चाहिए।

हाल ही में डीएमके ने केंद्र सरकार के पशु बिक्री बैन के आदेश के विरोध में चेन्नई में प्रदर्शन किया था। इस दौरान स्टालिन ने कहा था कि सरकार कैसे हमारी खाने की आदत पर पाबंदी लगा सकती है? क्या हम सिर्फ वही खाएंगे जो मोदी चाहते हैं? हमारे व्यक्तिगत अधिकार को केंद्र सरकार छीन रही है। तमिलनाडु के अलावा केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी सरकार के आदेश को असंवैधानिक बताता था। यही नहीं, मेघालय के बीजेपी नेताओं की ओर से भी केंद्र के इस फैसले पर आपत्ति जताई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगा केंद्र से जवाब
वहीं, वध के लिए पशु बाजार में मवेशियों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध संबंधी 26 मई को जारी अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब देने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा ने पीठ को बताया कि अधिसूचना जारी करने का मकसद देशभर में मवेशियों के व्यापार की एक व्यवस्था स्थापित करना है।

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