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तमिलनाडु: मद्रास हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक विधानसभा में बहुमत परीक्षण पर लगाई रोक

18 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के साथ ही 234 सदस्यीय विधानसभा में महज 215 निर्वाचित सदस्य रहे गए हैं।
अन्नाद्रमुक (AIADMK) विरोधी गुट के नेता टी टी वी दिनाकरन। (photo source – Indian express)

तमिलनाडु के स्पीकर द्वारा टीटीवी दिनाकरण के समर्थक 18 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मद्रास उच्च न्यायालय में बुधवार को सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने विधानसभा में फ्लोर टेस्‍ट कराने पर रोक को आगे बढ़ा दिया है, यानी अगले आदेश तक बहुमत परीक्षण नहीं हो पाएगा। इसके अलावा अदालत ने चुनाव आयोग द्वारा खाली घोषित की गईं 18 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव नोटिफिकेशन जारी करने पर भी रोक लगा दी है। जस्टिस एम दुराईस्‍वामी ने अयोग्‍य करार दिए गए 18 विधायकों की याचिका पर यह अंतरिम फैसला सुनाया। 18 विधायकों में से आठ विधायक कल अदालत पहुंचे थे। उन्होंने दल बदल विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ उठाए गए कदम को चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी अलग-अलग याचिकाओं में स्पीकर पी धनपाल के आदेश पर हमला बोला और इस आदेश को ‘अनाधिकृत’ एवं ‘अवैध’ बताया।

याचिकाओं में मांग की गई थी कि स्पीकर, सरकारी प्रमुख सचेतक एस राजेंद्रन, मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी और विधानसभा सचिव को निर्वाचित प्रतिनिधियों के तौर पर उनके अधिकारों में हस्तक्षेप करने से रोका जाए। राजेंद्रन की याचिका पर कदम उठाते हुए स्पीकर ने सोमवार को दलबदल विरोधी कानून और संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत 1986 में बने अयोग्यता संबंधी नियमों के तहत 18 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया था। ये विधायक अन्नाद्रमुक के नेता टीटीवी दिनाकरण के समर्थक थे।

विधायकों ने 22 अगस्त को राज्यपाल सी विद्यासागर राव से मुलाकात करके मुख्यमंत्री में अविश्वास जताया था। इसके बाद मुख्य सचेतक स्पीकर के पास गए थे। दिनाकरण ने विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने की निंदा करते हुए कहा था कि वे स्पीकर के कदम को कानूनी तौर पर चुनौती देंगे। याचिकाकर्ताओं के नाम हैं- पी वेट्रीवल, एन जी प्रतिबान, पी पलानीअप्पन, जयंती पदमनाभन, सेंथिल बालाजी, आर मुरूगन, आर बालसुब्रमणि और एस मुथैया।

18 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के साथ ही 234 सदस्यीय विधानसभा में महज 215 निर्वाचित सदस्य रहे गए हैं। एक सीट पहले से ही खाली है। अब सरकार को शक्तिपरीक्षण की स्थिति विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए महज 108 वोटों की जरूरत होगी।

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  1. Sidheswar Misra
    Sep 21, 2017 at 9:24 am
    याद करे एक वर्तमान में राज्य्पाल पूर्व में विधान सभा अध्यछ रहे उन्होने १३ को ३९ बना दलबदल करा के मुलायम सिंह की सरकार को बचाया .उसकी अपील हुई सर्वोच्य न्यायलय में सर्वाच्य न्यायलय ने विधान ा अध्यछ के फैसले को गलत करार दिया .उसी का एहसान मुलायम सिंह बीजेपी के साथ अभी भी चूका रहे है .ऐसी ही घटना तमिलनाडु में हो रहा है विरोधी की स समाप्त कर के .संबिधान का अपमान कहा जाता है की विधान सभा अध्यछ किसी भी दल का सदस्य नहीं रहता जब वह अध्यछ बन जाता है .लिकेन प्रतच्छ में यह गलत है उनका निर्णय देखे वह हमेशा सरकार के साथ रहता है .लोक सभा अध्यछ सव.रवि रे को छोड़ कर .
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