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महिला दिवस 2017: पहली बार लाश उठाते वक्‍त चीख पड़ी थी 5,000 कब्रें खोदने वाली महिला

43 वर्षीय चिनम्मा को अंग्रेजी, कन्नड़ और हिंदी समेत 5 भाषाएं आती है। हैरानी की बात ये है कि चिनम्मा को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में कोई जानकारी नहीं, लेकिन उन्हें खुशी हुई की महिलाओं के लिए भी कोई दिन होता है।
चिन्नम्मा हनुमंतपुरा हिन्दू कब्रिस्तान श्रीरामपुरा में कार्यरत हैं और अपने क्षेत्र में वो अन्य महिलाओं के लिए मिसाल के तौर पर उभर रही हैं।

एक कब्रिस्तान में नौकरी मिलने के बाद चिनम्मा पहले ही दिन वहां से भाग गई थीं, लेकिन वो 4 बेटियों की खातिर नौकरी पर फिर वापिस चली गईं। नौकरी के 13 साल में चिनम्मा अब तक 5000 शवों को दफना चुकी हैं। जब चिन्नम्मा ने यह काम शुरू किया था, तब उनकी मजबूरी थी, लेकिन आज उनको गर्व होता है। उन्हें लगता है कि वो शवों की अंतिम क्रिया में योगदान देकर मानवता की सेवा कर रही हैं। चिनम्मा ने इसी पेशे को अपना मिशन बना लिया है। अपने पति की मृत्यु के बाद वो काफी निराश हो गई थीं, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वो अपने बच्चों का भरण-पोषण कैसे करें, लेकिन कुदरत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। चिन्नम्मा हनुमंतपुरा हिन्दू कब्रिस्तान श्रीरामपुरा में कार्यरत हैं और अपने क्षेत्र में वो अन्य महिलाओं के लिए मिसाल के तौर पर उभर रही हैं।

43 वर्षीय चिनम्मा को अंग्रेजी, कन्नड़ और हिंदी समेत 5 भाषाएं आती है। हैरानी की बात ये है कि चिनम्मा को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में कोई जानकारी नहीं, लेकिन उन्हें खुशी हुई की महिलाओं के लिए भी कोई दिन होता है। उनका कहना है कि वो उस दिन खुश होंगी, जिस दिन उनकी बेटियां पढ़-लिखकर कुछ बन जाएगी और वो उनकी शादी करा देंगे।

चनम्मा ने 1987 में गणेश से शादी की थी, जो कि लाशों को दफनाने का ही काम करते थे। 2000 में पति की मौत के बाद उनकी दुनिया ही बदल गई और घर चलाना मुश्किल हो गया। बीबीएमपी आयुक्त से नौकरी का आवेदन करने पर उन्हे 12 दिसंबर 2003 में नौकरी पर रख लिया गया। उनकी सैलरी उस वक्त 1000 रूपये तय की गई। चिनम्मा ने बताया, ‘मुझे याद है जब एक पुलिसकर्मी का शव लाया गया था। उसकी मृत्यु सड़क हादसे में हुई थी। उसका पूरा शरीर क्षत-विक्षत हालत में था। मैं उसको देखकर चिल्ला पड़ी थी और भाग गई थी। लेकिन फिर दूसरा कोई विकल्प न होने की वजह से मजबूरी में यह काम करना पड़ा। मैं कई दिनों तक भूखा नहीं सो सकती थी।’

चिनम्मा बताती हैं कि वो 13 सालों से 6×3 फीट की कब्रों में शवों को दफना रही हैं। वो सोमवार को भी 2 शवों को दफना देती हैं। उनके पास शवों की बुकिंग पहले ही हो जाती है।

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