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स्कॉलरशिप की संख्या में गिरावट लफ्फाजी: योगेंद्र यादव

दिल्ली में दलित और पिछड़े वर्ग के वजीफों की संख्या में कमी के आरोपों पर केजरीवाल सरकार की सफाई को स्वराज इंडिया ने खारिज करते हुए कहा है कि आप सरकार की दलील लफ्फाजी है।
Author नई दिल्ली | January 24, 2017 01:27 am

दिल्ली में दलित और पिछड़े वर्ग के वजीफों की संख्या में कमी के आरोपों पर केजरीवाल सरकार की सफाई को स्वराज इंडिया ने खारिज करते हुए कहा है कि आप सरकार की दलील लफ्फाजी है। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कुछ नए आंकड़े पेश करते हुए कहा कि इनसे पता चलता है कि समाज के दलित-वंचित तबके में शिक्षा की स्थिति को सुधारने के प्रति आप सरकार के लोग कितने गंभीर हैं। दिल्ली में दलित वजीफा की संख्या में आई कमी पर स्वराज इंडिया ने आम आदमी पार्टी को नए आंकड़ों के साथ घेरा है। जिसमें एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों के वजीफों में गिरावट नामांकन संख्या में कमी की वजह से है। यादव ने कहा, ‘यह कहना कि नामांकन कम होने की वजह से एससी/ओबीसी कोटा के वजीफा की संख्या में कमी आई है, गलत है। आंकड़े बताते हैं कि कुल नामांकन में 1.8% की कमी आई है। अगर एससी नामांकन को देखें तो मात्र 1.0% की कमी है। जबकि एससी कोटा के वजीफा की संख्या में 9.3% की कमी है, जो कि घोर चिंताजनक है। इससे साफ पता चलता है कि समाज के दलित-वंचित तबके में शिक्षा की स्थिति को सुधारने के प्रति ये लोग कितने गंभीर हैं!’

स्वराज इंडिया ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उसके अनुसार, एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों को दिए जाने वाले स्कूल स्कॉलरशिप की संख्या साल 2014-15 में 7,50,021 थी, जो साल 2015-16 में घट कर 6,79,976 हो गई। यानी वजीफों की संख्या में 70,045 की कमी आई। ऐसी ही एक योजना उच्च शिक्षा के लिए है ‘कॉलेज और विश्वविद्यालय छात्रों के लिए मेरिट स्कॉलरशिप’। इसमें भी पिछले दो सालों में एससी/एसटी/ओबीसी को मिले वजीफों की संख्या 13,898 से घट कर 8,361 हो गई है, जो 40 फीसद की कमी है। वहीं सरकारी स्कूलों में एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों के लिए ट्यूशन फीस की भरपाई वाली योजना में भी लाभान्वितों की संख्या साल 2014-15 में 26,777 थी। जो साल 2015-16 में घट कर 23,650 हो गयी है। यहां 3 हजार से ज्यादा की कमी आई है।

स्वराज इंडिया के अनुसार सबसे बुरी हालत वोकेशनल और टेक्नीकल एजुकेशन के लिए एससी/एसटी/ओबीसी को दिए जाने वाले वजीफे की है। साल 2014-15 में 2,062 छात्रों को यह वजीफा मिला था। लेकिन साल 2015-16 में यह संख्या शून्य है, किसी को भी नहीं दिया गया। नवगठित पार्टी ने कहा कि ये तथ्य आम आदमी पार्टी के दलित विरोधी चेहरे को बेनकाब कर रहे हैं और साथ ही दिल्ली सरकार के शिक्षा क्रांति के दावों को खोखला साबित कर रहे हैं।

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