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विलुप्त होती कला से सजेगा इस बार का सूरजकुंड मेला

1 से 15 फरवरी तक लगने वाले 31वें सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में इस बार पर्यटकों को झारखंड की चित्रकला से परिचित होने का मौका मिलेगा।
Author सूरजकुंड | January 24, 2017 02:04 am
Faridabad: Thai artists at main Chaupal at Surajkund International Crafts Mela in Faridabad on Wednesday. PTI Photo (PTI2_3_2016_000159A)

1 से 15 फरवरी तक लगने वाले 31वें सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में इस बार पर्यटकों को झारखंड की चित्रकला से परिचित होने का मौका मिलेगा। झारखंड की ये कलाकारी पूरी तरह से प्रकृति की सामग्रियों पर निर्भर होती है। सबसे मशहूर जादू पेटिया कला के माध्यम से कलाकार मेला परिसर की दीवारों को सजाने में लगे हुए हैं। इस तरह की कलाकृतियां झारखंड की अलग-अलग जनजातियां अपने मिट्टी के घरों की बाहरी और भीतरी दीवारों को सजाने में करतीं हैं। टोडका, कोहबर कला को भी सूरजकुंड मेले में दर्शाया जा रहा है। आदिवासी क्षेत्रों की ये वो चित्रकलाएं हैं जो समय के साथ होते शहरीकरण के कारण विलुप्त होने के कगार पर हैं। सूरजकुंड मेले में अलग से 50 स्टॉल लगाए जाएंगे।

फरीदाबाद के उपायुक्त एवं हरियाणा पर्यटन विभाग के एमडी समीरपाल ने बताया कि हमारे देश में ऐसी बहुत हस्तशिल्प कलाएं हैं, जो एक बड़ी आबादी की नजर से अब भी अछूती हैं और इनके कलाकार इन कलाओं की मांग में कमी के कारण अगली पीढ़ी तक इस कला को आगे नहीं पहुंचा रहे। ऐसी ही कला को बचाने के लिए हरियाणा पर्यटन विभाग की ओर से पहल की जा रही है। हरियाणा पर्यटन विभाग ने मेले में हिस्सा ले रहे देश के सभी राज्यों को इस संबंध में पत्र लिख कम से कम ऐसी दो कलाएं सूरजकुंड मेले में भेजेने की गुजारिश की गई है जो लुप्त होने की कगार पर हैं।

समीरपाल ने बताया कि इस बार सूरजकुंड मेले का दायरा भी बढ़ाया गया है और स्टॉलों की संख्या एक हजार या उससे अधिक रहने की उम्मीद है। पिछले मेले में 23 देशों ने हिस्सा लिया था। उम्मीद है कि इस बार इस संख्या में भी इजाफा होगा। पाकिस्तान के साथ बहुत से देशों को मेले में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है। पिछली बार मेले में लगभग 12 लाख लोगों ने सूरजकुंड मेला देखा था।

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