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अखिल भारतीय बार परीक्षा पर जवाब मांगा सुप्रीम कोर्ट ने

बीसीआइ वकालत के पेशे में आने की इच्छा रखने वाले किसी वकील की योग्यता परखने के लिए अखिल भारतीय बार परीक्षा का आयोजन करती है और इसे आवश्यक बना दिया गया है।
Author नई दिल्ली | March 3, 2016 00:46 am
उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर बार काउंसिल आॅफ इंडिया से जवाब मांगा जिसमें वकालत का लाइसेंस प्रदान करने के लिए अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआइबीई) आयोजित करने को चुनौती दी गई है। इसने कहा कि पेशे में बहुत भीड़ हो गई है और प्रणाली सुधार की मांग कर रही है। प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि मामले का तीन जजों की पीठ द्वारा विस्तृत परीक्षण किए जाने की आवश्यकता है। साथ ही संकेत दिया कि वह प्रणाली में सुधार में मदद करने के लिए अदालत मित्र नियुक्त कर सकती है।

पीठ ने यह भी कहा कि वह इस बात का परीक्षण करेगी कि बार परीक्षा का आयोजन वकील कानून की वैधानिक मंजूरी के दायरे में आता है या नहीं। अदालत ने कहा कि हमारे पास पेशे में काम कर रहे बहुत अधिक वकील हैं और इस पेशे में भीड़ हो गई है। लिहाजा यह सुनिश्चित करने के लिए एक प्रणाली होनी चाहिए कि केवल सक्षम पेशेवर ही इस पेशे में प्रवेश कर सकें। प्रणाली सुधारों की मांग कर रही है। अदालत आर नागभूषण की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें बार परीक्षा पर बार काउंसिल आॅफ इंडिया (बीसीआइ) की अधिसूचना को इस आधार पर रद्द करने का आग्रह किया गया है कि इससे वकालत की प्रैक्टिस करने के लिए योग्य व्यक्ति को मिला संवैधानिक अधिकार छिनता है।

बीसीआइ वकालत के पेशे में आने की इच्छा रखने वाले किसी वकील की योग्यता परखने के लिए अखिल भारतीय बार परीक्षा का आयोजन करती है और इसे आवश्यक बना दिया गया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा था कि वकालत की प्रैक्टिस करने का अधिकार एलएलबी डिग्री धारकों के लिए मौलिक अधिकार है और वह वकालत का लाइसेंस प्रदान करने के लिए बीसीआइ द्वारा परीक्षा आयोजन अधिकार को नकारती है। बीसीआइ ने दावा किया था कि परीक्षा आधारभूत स्तर पर कौशल का आकलन करती है और वकालत की प्रैक्टिस के लिए न्यूनतम मानदंड तय करती है। बार इकाई ने कहा कि यह (परीक्षा) किसी उम्मीदवार की विश्लेषणात्मक योग्यता और कानून की आधारभूत जानकारी को परखती है। परीक्षा को प्रभावी बनाने वाली अधिसूचना को कानूनी शिक्षा समिति और बार काउंसिल आॅफ इंडिया के सदस्यों ने 10 और 30 अप्रैल, 2010 को हुई बैठकों में पारित किया था।

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