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सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- मात्र 7,850 रुपये शराब पर हुए खर्च, क्या ये जुर्म है?

तीस्ता सीतलवाड़ पर गुजरात दंगा के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मिले फंड में हेरफेर और भ्रष्टाचार करने का आरोप है।
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़। (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के बैंक खातों से लेने-देन से लगी रोक को हटाने की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिल खानविल्कर इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। बुधवार (5 जुलाई) को इस मामले पर अदालत में सुनवाई हुई। गुजरात सरकार ने अदालत में कहा कि तीस्ता ने सेकुलर शिक्षा के लिए फोर्ड फाउंडेशन से मिले पैसे को अपने व्यक्तिगत कामों के लिए खर्च किया, इसमें शराब पर किया गया खर्च भी शामिल था। जबकि तीस्ता सीतलवाड़ को ये पैसा सेकुलर एजुकेशन पर खर्च करने के लिए मिला था। अपने बचाव में तीस्ता सीतलवाड़ ने गुजरात सरकार के आरोपों को खारिज किया और कहा कि राज्य सरकार उन्हें तंग कर रही है और उनकी गतिविधियों को ठप करना चाहती है। तीस्ता सीतलवाड़ ने अदालत से कहा, ‘शराब पर सिर्फ 7,850 रुपये सात सालों में खर्च किये गये, और ये खर्च भी फोर्ड फाउंडेशन, जिसने कि दान में पैसे दिये थे, द्वारा इजाजत के बाद खर्च किया गया था। तीस्ता ने कहा कि क्या यह एक अपराध है?

बता दें कि तीस्ता सीतलवाड़ पर गुजरात दंगा के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मिले फंड में हेरफेर और भ्रष्टाचार करने का आरोप है। तीस्ता सीतलवाड़ उनके पति और दो गैर सरकारी संगठनों, सबरंग ट्रस्ट और सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील किया है जिसमें हाईकोर्ट ने उनके बैंक खातों से लेन-देन पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया था। बता दें कि गुजरात की एक निचली अदालत ने तीस्ता सीतलवाड के बैंक खातों को सीज कर दिया था। इससे पहले गुलबर्ग सोसायटी के एक शख्स ने तीस्ता और दूसरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर कहा था कि एनजीओ को मिले पैसे गुलबर्ग सोसायटी में गुजरात दंगा में मरने वालों की याद में एक म्यूजियम बनाने के लिए मिला था लेकिन तीस्ता ने इस पैसे को व्यक्तिगत उपभोग पर खर्च किया। तीस्ता सीतलवाड़ का कहना है कि उनके बैंक अकाउंट को गलत तरीके से सीज किया गया।

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