December 06, 2016

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गणित के वीडियो ने संवारा स्टूडेंट्स का भविष्य

शिक्षकों की कमी से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के नक्सल पीड़ित कांकेर जिले के विद्यार्थी वीडियो के माध्यम से गणित पढ़ रहे हैं। इस अनोखी पहल के कारण यहां के सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर सुधरा है।

Author रायपुर | November 5, 2016 02:52 am

शिक्षकों की कमी से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के नक्सल पीड़ित कांकेर जिले के विद्यार्थी वीडियो के माध्यम से गणित पढ़ रहे हैं। इस अनोखी पहल के कारण यहां के सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर सुधरा है।छत्तीसगढ़ के नक्सल ग्रस्त बस्तर क्षेत्र के कांकेर जिले में भी अन्य जिलों की तरह शिक्षकों की कमी है। यहां के स्कूलों में गणित और विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं के बराबर है। ऐसे में विद्यार्थी इन विषयों में लगातार फेल हो रहे थे। शिक्षकों की कमी को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपनी अभिनव पहल के माध्यम से शिक्षकों की कमी को कुछ हद तक दूर कर दिया है। जिलाधिकारी ने सेतू परियोजना से जिले के लगभग सौ सरकारी स्कूलों में वीडियो के माध्यम से गणित विषय पढ़ाने की पहल की है।
कांकेर के जिलाधिकारी शम्मी आबिदी का कहना है, ‘बस्तर क्षेत्र के जिलों में नक्सल समस्या तथा पिछड़ेपन के कारण यहां शिक्षकों की कमी रहती है। राज्य के अन्य क्षेत्रों से यहां शिक्षक आना नहीं चाहते हैं। यहां संसाधनों और प्रशिक्षण का भी अभाव है। ऐसे में अगर विद्यार्थियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया, तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए सेतु परियोजना शुरू की गई है। उसमें वीडियो के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।’
आबिदी ने कहा, गणित का यह वीडियो पाठ्यक्रम नौवीं कक्षा के लिए बनाया गया है। वहीं प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के शिक्षकों को भी सप्ताह में एक बार इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। जिले के 100 स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को पढ़ाया जा रहा है। वीडियो के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने के बाद देखा गया है कि इन बच्चों में सीखने की क्षमता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि इस तरह का प्रयोग हिंदी माध्यमों के स्कूलों में बच्चों के लिए किया गया है। शिक्षा सत्र के साथ ही यह कोर्स शुरू किया गया तथा इस महीने के मध्य में इसे पूरा कर लिया जाएगा।

 


कांकेर की जिलाधिकारी शम्मी आबिदी ने कहा, ‘यह वीडियो पाठ्यक्रम स्क्रीनकास्टिंग तकनीक की मदद से तैयार किया गया है। इस तरह के वीडियो पाठ्यक्रम का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं में भी किया जाता है।’ उन्होंने बताया कि बस्तर क्षेत्र में गणित और विज्ञान विषय के शिक्षकों की कमी को देखते हुए राज्य शासन द्वारा विद्या मीतान योजना शुरू की गई थी। इससे कुछ हद तक शिक्षकों की कमी दूर हुई है। लेकिन अंदरूनी क्षेत्रों में अभी भी इसकी कमी है।’ जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले साल दिसंबर महीने में जब जिले में शिक्षा के स्तर की समीक्षा की जा रही थी, तब पाया गया कि नौवीं और 10वीं कक्षा के छात्र बुनियादी गणित के आसान सवालों को भी हल नहीं कर पा रहे हैं। वहीं शिक्षकों में भी कौशल की कमी पाई गई। इसके साथ-साथ यह भी ज्ञात हुआ कि प्राथमिक और माध्यमिक कक्षा के गणित के शिक्षकों ने कला विषय से अपनी पढ़ाई पूरी की है।

आबिदी ने कहा, डीआइएसई (डिस्ट्रिक्ट इनफारमेशन सिस्टम फार एजुकेशन) की वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के मुताबिक कांकेर जिले के 188 माध्यमिक शालाओं में गणित की कक्षाएं कला विषय के शिक्षक ले रहे हैं। इससे छात्रों के सीखने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है और वे विषय पर लगातार कमजोर होते जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब जिले में शिक्षा का स्तर देखा गया तब महसूस किया गया कि अगर बच्चों को वीडियो के माध्यम से शिक्षा दी जाती है तब इसमे सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि गणित विषय की पढ़ाई के लिए 63 वीडियो तैयार किए गए है। प्रत्येक वीडियो 30 मिनट का है। इसमें कक्षा तीन से लेकर आठ तक के लिए बुनियादी गणित का पाठ्यक्रम शामिल है। जिसमें जोड़, घटाना, गुणा, भाग, समीकरण, प्रतिशत, अनुपात आदि शामिल हैं। ये वीडियो गणित के साथ साथ भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भूगोल जैसे विषयों में भी विद्यार्थियों की मदद करेंगे। पाठ्यक्रम उच्चतर शालाओं के गणित विषय के शिक्षकों द्वारा तय किया गया है।

शम्मी आबिदी ने कहा कि सेतु परियोजना के तहत वीडियो के माध्यम से कक्षा नौवीं के बच्चों को पढ़ाया जाता है। इसके लिए स्कूल में टीवी, प्रोजेक्टर और हार्ड डिस्क के माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है। इसके लिए स्कूल में टाइम टेबल तय किया गया है। जब टीवी या प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है, तब शिक्षक का वहां उपस्थित होना जरूरी है। स्व-मूल्यांकन के लिए सवालों का एक सेट भी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूलों के गणित विषय के शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए भी व्यवस्था की गई है। शिक्षकों को जिलास्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अभी तक जिले में 538 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में इसी तरह की एक अन्य परियोजना प्रज्ञा भी चलाई जा रही है। इस परियोजना का भी उद्देश्य जिले के हाई स्कूल तथा हायर सेकेंड्री स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय के शिक्षकों की कमी को दूर करना और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है।

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First Published on November 5, 2016 2:51 am

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