December 09, 2016

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सिमी भारत में चाहता है इस्लामी राज्य, कुरान को ही मानता है संविधान

सिमी की स्थापना 25 अप्रैल 1977 को जमात-ए-इस्लामी हिंद के छात्र इकाई के तौर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुई थी।

भोपाल सेन्ट्रल जेल से फरार सिमी के सदस्य, बाद में जिन्हें पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया। (फोटो-स्क्रीनशॉट)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जेल से आठ कथित सिमी सदस्यों के फरार होने और चंद घंटों बाद पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के दावों से बाद ये संगठन फिर से चर्चा में है। स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) की स्थापना 25 अप्रैल 1977 को अलीगढ़ में जमात-ए-इस्लामी हिंद के छात्र इकाई के तौर पर हुई थी। साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल के अनुसार सिमी के पहले अध्यक्ष मोहम्मद अहमदुल्लाह सिद्दीक़ी अमेरिका की वेस्टर्न इलिनॉय यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी और पत्रकारिता के प्रोफेसर हैं। सिमी का जमात-ए-इस्लामी से 1981 में फलस्तीनी नेता यासिर अराफात लेकर मतभेद हो गया। यासिर अराफात भारत यात्रा पर थे। सिमी ने उनके विरोध में काले झंडे दिखाए। सिमी अराफात को पश्चिमी देशों का पिट्ठू मानता था, जबकि जमात-ए-इस्लामी उन्हें फलस्तीनियों की आजादी की लड़ाई का नायक मानता था। इसके बाद जमात-ए-इस्लामी ने सिमी को खुद से अलग कर दिया।

जमात-ए-इस्लामी से अलग होने के बाद भी सिमी की गतिविधियां जारी रहीं। उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश और केरल इत्यादि राज्यों में भी इसकी शाखाएं खुल गईं। सिमी खास तौर पर मुस्लिम या मुस्लिमबहुल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाता था और वहां के नौजवान छात्रों को संगठन में शामिल करता था। सिमी का मकसद भारत में “दार-उल-इस्लाम” (इस्लाम का शासन) स्थापित करना है। इसके लिए संगठन जिहाद का अपना रास्ता बताता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सिमी का ध्येय वाक्य है, “अल्लाह हमारा मालिक है, कुरान हमारा संविधान है, मोहम्मद हमारे नेता हैं, जिहाद हमारा रास्ता है और शहादा हमारी ख्वाहिश है।”

भोपाल जेल से फरार सिमी सदस्यों का कथित वीडियो:

अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने अनलाफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट 1967 के तहत सिमी पर प्रतिबंध लगा दिया। दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2001 में सिमी के तत्कालीन तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर शाहिद बद्र फलाही को नई दिल्ली के जाकिर नगर इलाके से गिरफ्तार किया। सिमी के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी सफदर नागोरी को मार्च 2008 में मध्य प्रदेश के इंदौर से 12 अन्य सिमी सदस्यों के साथ गिरफ्तार किया गया। नागोरी 2001 से फरार था। गिरफ्तार लोगों में सफदर का भाई करीमुद्दीन नागोरी भी शामिल था। पुलिस के अनुसार करीमुद्दीन पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संपर्क में था। आईएसआई नए नामों से सिमी जैसे संगठन खड़े करने में उसकी मदद कर रही थी। सिमी की उत्तर प्रदेश इकाई का प्रमुख मोहम्मद आमिर ने साल 2006 में अदालत में समर्पण कर दिया। आमिर पर कानपुर दंगों में शामिल होने का आरोप था। सफदर नागोरी के बाद सिमी की कमान संभालने वाला अबुल बशर क़ासमी यूपी के आजमगढ़ का रहने वाला है। उस पर जुलाई 2008 में अहमदाबाद (गुजरात) में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। क़ासमी को पुलिस ने अगस्त 2008 में गिरफ्तार किया।

सिमी को रियाद (सऊदी अरब) स्थित वर्ल्ड एसेंबली ऑफ मुस्लिम यूथ (वाईएएमवाई) और कुवैत स्थित इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (आईआईएफएसओ) को आर्थिक मदद मिलती थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान स्थित कई संगठन भी सिमी को काफी पैसा देते थे। अमेरिका के शिकागो में स्थित कंसल्टिव कमेटी ऑफ इंडिन मुस्लिम भी सिमी को आर्थिक मदद देता था। इसके अलावा उसे बांग्लादेश, नेपाल, अफगानिस्तान, इराक और सीरिया के कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों से भी मदद मिलती थी। सितंबर, 2001 को सिमी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शाहिद बद्र फलाही ने मीडिया से बातचीत में कहा था सिमी का मकसद मुस्लिम छात्रों का शरीयत के मुताबिक चरित्र निर्माण कराना है. तब फलाही ने दावा किया था कि देश के 17 राज्यों में संगठन के 950 अंसार (सक्रिय सदस्य) हैं.

साल 2008 दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्याप्त आधार न होने का हवाला देते हुए सिमी से प्रतिबंध हटा दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अगले ही दिन हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया गया। साल 2014 में केंद्र सरकार ने अनलाफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट 1967 के तहत संगठन पर फिर से पांच साले के लिए प्रतिबंध लगा दिया। केंद्र सरकार ने कहा कि अगर संगठन पर लगाम नहीं लगाई गई तो इससे देश की अखंडता और एकता को खतरा पहुंच सकता है।

देश की विभिन्न जेलोंं में बंद सिमी के सदस्यों पर टाडा, मकोका और यूएपीए 1967 के तहत मामले चल रहे हैं। माना जाता है कि संगठन आधिकारिक तौर पर बंद हो चुका है लेकिन इसके पूर्व सदस्य नए संगठनों के तहत काम कर रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि सिमी के ही पूर्व सदस्यों ने इंडियन मुजाहिद्दीन का गठन किया है। इंडियन मुजाहिद्दीन पर पिछले कुछ सालों में देश में हुए कई धमाकों में शामिल होने का आरोप है।

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First Published on November 1, 2016 11:46 am

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