December 06, 2016

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नगरोटा हमले के चश्मदीद ने बताई आंखों देखी, कहा- मौत बरस रही थी, आर्मी को देखा तो लौटी बचने की उम्‍मीद

नगरोटा में हुए आतंकी हमले में भारतीय सेना के सात जवान शहीत हो गए थे।

Author November 30, 2016 21:22 pm
जम्‍मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे पर पैट्रोल करते सेना के जवान। (Photo: PTI)

जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में बचने वालों में से एक फकीर चंद (42) ने बताया कि जब तक उसने बचने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन उसने जब जवानों को आतंकियों से लड़ते हुए देखा तो उसकी उम्मीद वापस लौटी। चंद नगरोटा विधानसभा क्षेत्र के कौर जगीराम गांव का रहने वाला है। वह 166 मीडियम रेजिमेंट यूनिट के पास की इमारत जीआरईएफ बिल्डिंग में चौकीदार है। उसने बताया, ‘मैंने एक विस्फोट की आवाज सुनाई दी तो पहले सोचा कि हो सकता है कि किसी ट्रक का टायर फटा होगा। लेकिन जब उसके बाद गोलियों की आवाज सुनी तो मैंने महसूस किया कि आतंकियों ने हमला कर दिया।’ इसके बाद सेना के जवान मेरे पास आए और पहचान पत्र दिखाने के लिए बोला, जब मैंने उन्हें पहचान पत्र दिखाया तो उन्होंने मुझे बाहर नहीं आने के लिए बोला।

साथ ही उन्होंने बताया, ‘इसके तुरंत बाद विस्फोट की वजह से पत्थर और मिट्टी गिरने लगी। मैंने सोचा कि मेरी मौत आ गई है। हालांकि, जब मैंने देखा कि सेना के जवान बिना खाने और पानी की परवाह करते हुए आतंकियों से लड़ रहे हैं तो मुझे उम्मीद बनी कि मैं बच जाऊंगा।’ चंद मंगलवार रात को भी उसी इमारत में छुपे रहे।

बता दें, मंगलवार को जम्‍मू कश्‍मीर में दो जगहों पर आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया था। पहले नगरोटा में सेना की टुकड़ी पर फिदायीन हमला किया गया। आतंकियों ने ग्रेनेड फेंका और यूनिट के अंदर घुसने का प्रयास किया। इन हमलों में सेना के सात जवान शहीद हो गए। नगरोटा जम्‍मू से 20 किलोमीटर दूर है और हाइवे पर बसा हुआ है। यहां पर 16 कॉर्प्‍स का हैडक्‍वार्टर भी है।

बुधवार को बीएसएफ के डीजी केके शर्मा ने नगरोटा हमले में शामिल आतंकी बोर्डर पर एक सुरंग के रास्ते से घुसपैठ की है। अभी हमारे पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है, जिससे सुरंग का पता लगाए जा सके।

बता दें, खुफिया एजेंसियां पहले ही लश्कर-ए-तयैबा की एक टुकड़ी जो कि घाटी में छिपकर काम कर रही थी उस पर नजर रख रही थी। यह टुकड़ी16 कॉर्प्‍स के हेडक्‍वार्टर पर अटैक करने की प्लानिंग कर रही थी। इंडियन एक्सप्रेस को यह जानकारी एक सूत्र से मिली है। उसने बताया कि लश्कर ए तैयबा की टुकड़ी मंगलवार (29 नवंबर) को हुए हमले जिसमें 7 जवान शहीद हो गए उससे लगभग 2 हफ्ते पहले हमला करने की सोच रही थी। लगभग दस दिन पहले खुफिया एजेंसियों ने आगाह कर दिया था कि ऐसा कोई हमला हो सकता है। हालांकि, हमला घाटी से ऑपरेट होने वाले उस आतंकी सेल ने नहीं किया लेकिन फिर भी मंगलवार को हुए हमले ने कई सवाल पैदा कर दिए हैं। वे सवाल ये हैं कि पहले से जानकारी मिलने के बावजूद आतंकियों को रोकने के लिए क्या अतरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए और अगर किए गए तो वे लोग नगरोटा कैंप में हमला करने में कामयाब कैसे हो गए।

वीडियो में देखें- आर्मी चीफ दलबीर सिंह ने स्थिति का जायज़ा लेने के लिए नगरोटा का दौरा किया

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First Published on November 30, 2016 9:22 pm

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