December 03, 2016

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पक्षियों से उड़ कर आती हैं और भी कुछ बीमारियां

मनुष्यों में बर्ड फ्लू की आशंका के मद्देनजर सरकार ने चिड़ियाघर को 45 दिनों तक बंद करने के आदेश के अलावा और कई एहतियाती कदम उठाए हैं। पक्षियों के अन्य संक्रमण भी इंसानों के लिए घातक हो सकते हैं।

Author नई दिल्ली | October 29, 2016 01:27 am

मनुष्यों में बर्ड फ्लू की आशंका के मद्देनजर सरकार ने चिड़ियाघर को 45 दिनों तक बंद करने के आदेश के अलावा और कई एहतियाती कदम उठाए हैं। पक्षियों के अन्य संक्रमण भी इंसानों के लिए घातक हो सकते हैं। इसलिए इनको भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। दिल्ली से जांच के लिए भोपाल भेजे गए मृत पक्षियों के 45 नमूनों में से महज 13 नूमनों में ही ‘एच5एन8’ वायरस की पुष्टि हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि बाकी पक्षियों की मौत किस रोग से हुई है। इन सवालों पर पक्षी चिकित्सकों व वैज्ञानिकों का कहना है कि इनकी मौत अन्य कुछ बीमारियों से हुई हो सकती है। इसकी पुष्टि सभी मृत पक्षियों की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी। बर्ड फ्लू की अब तक आई रिपोर्ट के हिसाब से यह संक्रमण अभी घातक नहीं है। पर यह सवाल अभी भी बना है कि आखिर पक्षियों की मौत के पीछे कौन-कौन से रोग प्रमुख हैं? साथ ही क्या इनका मनुष्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है? चिकित्सकों की मानें तो इसमें और भी बीमारियां हो सकती हैं जो पक्षियों के साथ ही इंसानों के लिए भी खतरनाक हो सकती हैं। सर्दियों का मौसम शुरू होने व प्रवासी पक्षियों की आवाजाही व हलचल बढ़ने के साथ ही पक्षी अस्पताल में भी बीते कुछ दिनों में बीमार पक्षियों का आंकड़ा बढ़ गया है। हालांकि मनुष्यों पर प्रभाव के लिहाज से देखा जाए तो पक्षियों के तीन अन्य संक्रमण भी घातक हो सकते हैं।

पक्षी चिकित्सकों के मुताबिक पीजनपॉक्स वायरस की श्रेणी में आने वाले संक्रमण का असर लगभग सभी पक्षियों पर देखा जाता है। संक्रमित पक्षी की लार और दुर्गंध से हवा में फैले वायरस सांस के जरिए मानव शरीर में प्रवेश करते हैं। पीजनपाक्स का वैक्सीन उपलब्ध है। बीमारी होने के बाद इलाज किया जाता है जबकि संक्रमण से बचाव के लिए पक्षियों को इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। पक्षी अस्पताल के विशेषज्ञ डा. अमिताभ ने बताया कि सालमोनाइसेस टीएलआरफोर नाम के एक विशेष तरह के रिसेप्टर या वाहक को मुर्गों में सालमोनाइसेस की वजह माना जाता है। यह पैथोजेनिक संक्रमण है जिसका कारक टीएलआर प्रोटीन मानव शरीर की किडनी व लिवर और मस्तिष्क की कोशिकाओं में भी पाया जाता है। टीएलआरफोर संक्रमित पक्षी तीन से चार दिन के अंदर दम तोड़ देता है। इसमें पक्षी के शरीर ढीला और मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं।

क्रानिक रेस्पेरेटरी डिसीस (सीआरडी) या सांस संबंधी परेशानी पक्षियों में सबसे अधिक देखी जाती हैं। पक्षियों की कुल मौतों में से 70 फीसद मौत की वजह सीआरडी होती है। पक्षियों का सीआरडी आसानी से हवा के जरिए मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर सकता है। सीआरडी की एक अहम वजह प्रदूषण को भी माना जाता है। इसके अलावा पक्षियों में कंजेक्टिवाइटिस ,पेचिस और लकवा भी अहम हैं लेकिन यह संक्रमण मनुष्य के लिए खतरनाक नहीं है।

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First Published on October 29, 2016 1:27 am

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