December 10, 2016

ताज़ा खबर

 

शादी के बाजार में कर्फ्यू की तरह का सन्नाटा

केंद्र सरकार के पांच सौ व एक हजार रुपए के पुराने नोटों पर पाबंदी लगाने का सीधा असर शादियों पर पड़ने वाला है। शुक्रवार को 11 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के पुण्य नक्षत्र का योग बन रहा है।

केंद्र सरकार के पांच सौ व एक हजार रुपए के पुराने नोटों पर पाबंदी लगाने का सीधा असर शादियों पर पड़ने वाला है। शुक्रवार को 11 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के पुण्य नक्षत्र का योग बन रहा है। दिल्ली में इस दिन करीब 30 हजार शादियां हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन किसी भी जोड़े का विवाह कुंडली देखने के बाद बिना मुहूर्त काल घड़ी आदि देखे ही विवाह किया जा सकता है। जो परिवार जोड़े का विवाह युवक और युवती की कुंडली के गुण मिला कर करते हैं, वे विवाह का दिन और समय भी पंडितों से निकलवाते हैं। जोड़े की कुंडली को देखते हुए यदि विवाह का योग आगे के महीनों में निकलता है, लेकिन परिवार के लोग विवाह पहले करना चाहते हैं, तो वे शुक्रवार को बिना जोड़े की कुंडलियां दिखवाए, विवाह कर सकते हैं। यह दिन साल में एक ही बार आता है। इस शुभ दिन को देखते हुए देश भर में हजारों शादियां होती हैं। लेकिन शुक्रवार को जिन परिवारों में शादियां हैं, उन घरों में खुशियों के बजाए, चिंता है कि छोटे मोटे खर्च के लिए अब कहां से पैसों का इंतेजाम होगा। बेचैनी और घबराहट इस बात की कि यदि दोपहर तक नए नोटों का बंदोबस्त नहीं हुआ तो शगुन से लेकर कैटरर वाले और फूल वाले से लेकर विवाह करवाने वालों को पैसे कैसे दिए जाएंगे।

 
विवाह की रस्मों का सारा सामान किनारी बाजार और सदर बाजार के पहाड़ी धीरज से मिलता है। किनारी बाजार में इस सामान के मैन्यूफैक्चरर और रिटेलर हैं। सबसे पुरानी किनारी बाजार गोटा जरी एसोसिएशंस के अध्यक्ष प्रदीप जैन ने कहा कि बाजार में ग्राहकों का जो संकट बीते दो दिनों से है, वह पुरानी दिल्ली में कर्फ्यू के दौरान देखा है। जैन ने बताया कि जिन परिवारों ने विवाह के सामान का पहले ही से आर्डर दिया हुआ है, उन्होंने भी इन्हीं दिनों में सामान लेने आना था। कई परिवारों ने यहां के दुकानदारों को अग्रिम भी दिया हुआ है। अब उन्हें शगुन का सामान उठाने में ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गोटा जरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जिन परिवारों में इन दिनों शादियां हैं उन्हें अलग से छूट मिलनी चाहिए थी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 11, 2016 1:31 am

सबरंग