December 07, 2016

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वर्षो तक जेल में बंद रहकर बिरयानी खाते हैं आंतकवाद के आरोपी, फास्ट ट्रैक कोर्ट की है जरूरत: शिवराज चौहान

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि हमारे यहां भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर फास्ट ट्रैक अदालतें हो सकती हैं तो, आतंकवादियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें क्यों नहीं हो सकतीं?

Author भोपाल | November 2, 2016 21:14 pm
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आतंकवाद के आरोपियों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की वकालत की है।

आतंकवाद के मामलों की सुनवायी हेतु फास्ट ट्रैक अदालतों की वकालत करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सजा सुनाए जाने से पहले आरोपी वर्षों तक जेल में रहते हैं और वहां ‘चिकन-बिरयानी खाते हैं।’ उन्होंने कथित मुठभेड़ में सिमी के आठ कार्यकर्ताओं को मारे जाने में पुलिस की भूमिका का बचाव किया। मध्य प्रदेश में जिस तरह से प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के आठ सदस्यों को मार गिराया गया, उस पर विपक्षी दलों के अलावा देश की सर्वोच्च मानवाधिकार संस्था ने भी सवाल उठाए हैं। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हमलावर तेवर दिखाते हुए मंगलवार को एक भाषण के दौरान कहा, ‘जिन पर आतंकवाद से जुड़े मामलों में सुनवाई चलती है, उन्हें सज़ा मिलने में सालों लग जाते हैं। सालों तक उन्हें जेल में चिकन बिरयानी खिलाई जाती है फिर वे भाग जाते हैं, और फिर अपराध और हमले करते हैं। हमें आतंकवाद से जुड़े मामलों में भी फास्ट-ट्रैक अदालतों की ज़रूरत है।’

मध्यप्रदेश के 61वें स्थापना दिवस के अवसर पर कल देर रात राजधानी में आयोजित एक समारोह में चौहान ने कहा, ‘उन्हें सजा देने में वर्षों लगते हैं। वे जेल में चिकन और बिरयानी खाते रहते हैं, वे भागते हैं और अपराधों तथा हमलों में शामिल होते हैं। यदि हमारे यहां भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर फास्ट ट्रैक अदालतें हो सकती हैं तो, आतंकवादियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें क्यों नहीं हो सकतीं?’ चौहान ने आज भोपाल केन्द्रीय जेल का दौरा कर अधिकारियों को यहां की सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के निर्देश दिये। इस दौरान उनके साथ प्रदेश के मुख्य सचिव बीपी सिंह, पुलिस महानिदेशक रिषी कुमार शुक्ला, प्रदेश के जेल महानिदेशक संजय चौधरी भी मौजूद थे।

मालूम हो कि इस जेल से सोमवार की रात सिमी से जुड़े आठ कैदी जेल के एक सिपाही की हत्या करने के बाद फरार हो गये थे। इसके कुछ घंटों बाद ही भोपाल पुलिस ने शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर मणिखेड़ा पठार के पास कथित मुठभेड़ में इन्हें मार गिराया था। विपक्ष और पीड़ितों के परिजनों ने इस कथित ‘एनकाउंटर’ में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाये हैं।

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First Published on November 2, 2016 9:09 pm

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