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कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को कावेरी जल की आपूर्ति करने संबंधी न्यायिक आदेशों की बार-बार अवहेलना करने के लिए कर्नाटक सरकार को आज आड़े हाथों लिया और उसे आदेश दिया कि शनिवार से छह अक्तूबर तक वह छह हजार क्यूसेक जल छोड़े।
Author नई दिल्ली | October 1, 2016 00:49 am

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को कावेरी जल की आपूर्ति करने संबंधी न्यायिक आदेशों की बार-बार अवहेलना करने के लिए कर्नाटक सरकार को आज आड़े हाथों लिया और उसे आदेश दिया कि शनिवार से छह अक्तूबर तक वह छह हजार क्यूसेक जल छोड़े। अदालत ने साथ ही कर्नाटक को चेतावनी दी कि किसी को पता नहीं चलेगा कि वह कब कानून के कोप का शिकार हो जाएगा। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए जाने के तथ्य के बावजूद राज्य सरकार को एक से छह अक्तूबर के दौरान तमिलनाडु के लिए छह हजार क्यूसेक जल छोड़ने का अंतिम अवसर दिया। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने कहा कि राज्य होने के बावजूद कर्नाटक उसके आदेश की अवहेलना करके ऐसी स्थिति पैदा कर रहा है, जिससे कानून के शासन को धक्का पहुंच रहा है। हमने अपने आदेश पर अमल के लिए कठोर कार्रवाई की दिशा में कदम उठा लिए होते। लेकिन हमने कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड को निर्देश दिया है कि पहले वह वस्तुस्थिति का अध्ययन करे और एक रिपोर्ट पेश करे।


अदालत ने केंद्र सरकार को कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन चार अक्तूबर तक करने का निर्देश देते हुए कहा कि कर्नाटक को अवहेलना करने वाले रुख पर अडेÞ नहीं रहना चाहिए, क्योंकि किसी को यह नहीं मालूम कि वह कानून के कोप का कब शिकार हो जाएगा। शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण से संबंधित सभी राज्यों कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी को आदेश दिया कि वे शनिवार शाम चार बजे तक अपने उन प्रतिनिधियों के नाम बताएं, जिन्हें केंद्रीय जल संसाधन मंत्री की अध्यक्षता वाले बोर्ड में शामिल किया जाएगा।

जजों ने कहा- हम यह मानते हैं कि देश के संघीय ढांचे का हिस्सा होने के नाते कर्नाटक स्थिति के अनुरूप खरा उतरेगा और कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड की वस्तुस्थिति के बारे में रिपोर्ट आने तक किसी प्रकार का भटकाव नहीं दिखाएगा। अदालत ने कर्नाटक को यह भी याद दिलाया कि वह संविधान के अनुच्छेद 144 और शीर्ष अदालत के आदेश पर अमल में सहयोग के लिए बाध्य है।

इससे पहले मामले की सुनवाई शुरू होते ही कर्नाटक का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने उनके और राज्य के मुख्यमंत्री के बीच हुए संवाद का अदालत में हवाला दिया। दूसरी ओर तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ वकील शेखर नफडे ने सारी स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कर्नाटक पहले ही अपना मन बना चुका है कि वह शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करेगा।

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