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‘भारतीय परंपरा में हमेशा प्रासंगिक रहेगा सत्याग्रह’

साहित्य अकादेमी द्वारा महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह की सौवीं वर्षगांठ पर भारतीय साहित्य में सत्याग्रह विषयक राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया।
Author नई दिल्ली | April 29, 2017 00:41 am
गांधीवादी चिंतक व त्रिपुरा और मेघालय के पूर्व राज्यपाल सिद्धेश्वर प्रसाद ने कहा कि भारतीय लोग अब पश्चिम की ओर देखते हुए अपने सिद्धांत तय कर रहे हैं जबकि इस देश को भारतीय परंपरा के अनुसार देखने की आवश्यकता है।

साहित्य अकादेमी द्वारा महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह की सौवीं वर्षगांठ पर भारतीय साहित्य में सत्याग्रह विषयक राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया। गांधीवादी चिंतक व त्रिपुरा और मेघालय के पूर्व राज्यपाल सिद्धेश्वर प्रसाद ने कहा कि भारतीय लोग अब पश्चिम की ओर देखते हुए अपने सिद्धांत तय कर रहे हैं जबकि इस देश को भारतीय परंपरा के अनुसार देखने की आवश्यकता है। गुजराती लेखक एवं साहित्य अकादेमी के महत्तर सदस्य रघुवीर चौधरी ने कहा कि कम शब्दों में ज्यादा बात कहने की कला गांधी जी के पास थी और उन्होंने सामान्य लोगों को आपस में जोड़ने का अहम काम सत्याग्रह के जरिए बखूबी किया। साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि गांधी जी ने अपने व्यक्तित्व को कर्मनिष्ठा की ऐसी मिसाल बनाया जिससे हर कोई प्रभावित हुआ। चंपारण सत्याग्रह ने ही गांधी को महात्मा गांधी बनाया।

इससे पहले साहित्य अकादेमी के सचिव के श्रीनिवासराव ने कहा कि अकादेमी भी महात्मा गांधी पर एक बड़ी परियोजना को अंतिम रूप देने में सलंग्न है, जिसमें 24 भारतीय भाषाओं में महात्मा गांधी पर लिखे सृजनात्मक लेखन को पहले हिंदी और उसके बाद अंग्रेजी में प्रकाशित किया जाएगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि सत्याग्रह भारतीय परंपरा में है और हमेशा प्रासंगिक रहेगा।

वीरेंद्र कुमार बरनवाल ने चंपारण सत्याग्रह में गांधी जी के सहयोगियों का विस्तार से जिक्र किया और देबप्रसाद बंद्योपाध्याय ने विभिन्न कलाओं और सामाजिक समस्याओं के परिप्रेक्ष्य में आज सत्याग्रह के विभिन्न रूपों के बारे में बताया। गांधी शांति प्रष्ठिान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा कि वही साहित्य आम आदमी तक पहुंचता है जो उनकी भाषा में लिखा जाता है।

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