December 05, 2016

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क्या साइकिल पर अकेले चलेंगे अखिलेश?

तमाम कोशिशों, दावों और बयानों के बावजूद उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी यादव परिवार का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

Author लखनऊ | October 20, 2016 00:31 am

तमाम कोशिशों, दावों और बयानों के बावजूद उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी यादव परिवार का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पांच नवंबर को अपने गठन की रजत जयंती मनाने जा रही समाजवादी पार्टी के जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित कार्यक्रम के 48 घंटे पहले ही अखिलेश यादव समाजवादी विकास यात्रा पर निकलने जा रहे हैं। इस बात का एलान उन्होंने मुलायम सिंह यादव को लिखे पत्र में किया है। पत्र बुधवार को सार्वजनिक कर दिया गया। अखिलेश के इस पत्र के ठीक एक दिन पहले समाजवादी पार्टी से निकाले गए युवा नेता और पार्टी में मौजूद उनके समर्थकों ने भी रजत जयंती के बहिष्कार की घोषणा कर नेताजी की पेशानी पर बल पैदा किया है। यही वजह है कि बीते तीन दिनों से मुलायम अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ समस्या का मुकम्मल हल तलाशने के लिए बैठकें कर रहे हैं।  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीयअध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के अखिलेश यादव को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा कर अपने भाई शिवपाल सिंह यादव को उस कुर्सी पर बिठाने के बाद पार्टी और परिवार में शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि मुलायम सिंह यादव ने एक सप्ताह पहले खुद इस बात का दावा किया था कि बीते तीन पुश्तों से उनके परिवार में किसी तरह का कोई विवाद नहीं हुआ है। मगर मंगलवार को युवा सपाइयों का पार्टी के रजत जयंती समारोह के बायकाट का एलान और बुधवार को अखिलेश का नेताजी को लिखा गया पत्र कुछ और ही कहानी बयान करते नजर आ रहे हैं।

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री की हैसियत से 19 अक्तूबर को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है- उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संबंध में मेरे द्वारा तीन अक्तूबर से समाजवादी विकास रथ यात्रा के माध्यम से प्रचार-प्रसार का कार्यक्रम आरंभ करने की योजना थी। जो उस समय किन्हीं कारणों से शुरू नहीं की जा सकी। इस समय सभी राजनीतिक दल अपनी पार्टी के चुनाव में जुट गए हैं। ऐसी दशा में सरकार बनाने के लिए चुनाव प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से मैं तीन नवंबर से विकास से विजय की ओर समाजवादी विकास रथ यात्रा प्रारंभ करने जा रहा हूं।
उत्तर प्रदेश में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद विधानसभा चुनाव में अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर उतरने जा रही समाजवादी पार्टी, अंतरकलह से जूझ रही है। बुधवार को भी सपा सुप्रीमो ने पांच विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें कीं। नेताजी की इन बैठकों का नतीजा क्या निकाला? यह तो समय बताएगा, लेकिन जिस तरह बैठक खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद अखिलेश यादव ने अकेले चुनाव प्रचार पर निकलने की घोषणा की। उससे साफ है कि इस वक्त समाजवादी पार्टी दो खेमों में बंटती नजर आ रही है। एक खेमा मुलायम सिंह के साथ जुड़े सपाइयों का है, तो दूसरा खेमा अखिलेश और उनके युवा साथियों का।

अखिलेश और मुलायम के बीच चल रहे इस द्वंद्व को लेकर एक वरिष्ठ समाजवादी नेता कहते हैं, अखिलेश यादव विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह यादव, आनंद भदौरिया, यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद एबाद, युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष बृजेश यादव, विधान परिषद सदस्य संजय लाठर, यूथ ब्रिगेड के राष्टÑीय अध्यक्ष गौरव दूबे छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह का सपा से निष्कासन निरस्त कराना चाहते हैं। बीती 19 सितंबर को टीम अखिलेश के इन सभी युवा नेताओं को शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया था।
समाजवादी पार्टी में चल रही आपसी खींचतान किस मुकाम पर पहुंचेगी? यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस पूरी कवायद की बड़ी कीमत अखिलेश यादव के उस विकास के एजंडे को चुकानी पड़ेगी, जिसे लेकर उन्होंने बीते साढ़े चार सालों तक उत्तर प्रदेश में काम किया और जिसे आधार बना कर वे विधानसभा चुनाव मैदान में जाने का सब्जबाग पाल बैठे थे।

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First Published on October 20, 2016 12:30 am

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