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पायलट ने कहा- ‘बजट’ जन आकांक्षाओं के खिलाफ, टिकैत बोले- निराश हुए किसान

सचिन पायलट ने कहा कि वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने की बात की है लेकिन इस लक्ष्य को कैसे हासिल करेंगे इसका कोई रोड मैप नहीं दिया।
Author , जयपुर/मुजफ्फरनगर | March 1, 2016 00:27 am
सचिन पायलट ने कहा कि निवेश में 4.4 प्रतिशत की कमी सरकार की कार्यप्रणाली को आईना दिखा रही है। (फाइल फोटो)

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने आम बजट को सरकार का मध्यम वर्ग के हितों पर कुठाराघात बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट से देश में महंगाई बढ़ेगी। कृषि कल्याण सेस से सभी सेवाएं महंगी होने के साथ ही इन्फ्रा सेस और क्लीन एनर्जी सेस के कारण महंगाई आसमान छुएगी। उन्होंने कहा कि बजट में 20 हजार 600 करोड़ के नए कर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने की बात की है लेकिन इस लक्ष्य को कैसे हासिल करेंगे इसका कोई रोड मैप नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि बैंकों का एनपीए जहां तीन लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, उनको रिकैपिटलाइज करने के लिए मात्र 25 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। सरकार सस्ती दवाओं के लिए दुकानें बढ़ाने का दावा कर रही है लेकिन सरकार की मौजूदा समय की कार्यप्रणाली संशय पैदा कर रही है क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं की पिछले समय काफी अनदेखी हुई है। कांगे्रस अध्यक्ष ने कहा कि पहली बार देखने को मिल रहा है कि बजट में रक्षा क्षेत्र की अनदेखी की गई है और रक्षा बजट के बारे में किसी प्रकार का उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि देश प्रतिदिन अलगाव व आतंकवाद का सामना कर रहा है। पठानकोट हमले ने देश की बाह्य और आंतरिक सुरक्षा की कलई खोल कर रखी दी है।

पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मनरेगा को कोसते हुए उसे यूपीए सरकार की सबसे बड़ी विफलता बताया था और इसी प्रकार प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने मनरेगा कानून के खिलाफ केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी थी। पर अब राजग सरकार सरकार के बजट में इसके लिए उचित प्रावधान कर यूपीए द्वारा रोजगार सृजन के लिए बनाई गई इस स्वर्णिम योजना के महत्त्व पर मुहर लगा दी गई है। बजट में रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस रणनीति प्रस्तुत नहीं की गई जो युवा भारत की आकांक्षाओं पर पानी फेर रहा है।

पायलट ने कहा कि बजट के माध्यम से भाजपा का दोहरा चरित्र सामने आ गया है क्योंकि भाजपा व इसके सहयोगी संगठन स्वदेशी जागरण मंच आदि ने यूपीए शासनकाल के दौरान एफडीआइ का पुरजोर विरोध किया था और अब राजग सरकार ने फूड प्रोसेसिंग के लिए 100 प्रतिशत एफडीआइ को मंजूरी दे दी है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने राज्य के लिए विशेष पैकेज की मांग की थी परन्तु बजट में इसकी अनदेखी की गई है जो प्रदेशवासियों के लिए निराशा का बड़ा कारण है। पायलट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में बेतहाशा कमी होने से आमजन को उम्मीद थी कि जनता को टैक्स में राहत मिलेगी। लेकिन टैक्स स्लेब में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाना मध्यम वर्ग व उच्च मध्यम वर्ग के प्रति सरकार की संवेदनहीनता का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि निवेश में 4.4 प्रतिशत की कमी सरकार की कार्यप्रणाली को आईना दिखा रही है। सरकार दावा कर रही है कि बजट गांवों को समर्पित है लेकिन किसान को बदहाली से उबारने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया जाना सरकार के दावे को झुठला रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सचमुच सरकार को किसानों की चिंता है तो जैसे यूपीए सरकार ने किसानों के कर्ज को माफ किया था, वैसे इस बजट में भी आपदाओं के शिकार किसानों को राहत दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में आवास की समस्या प्रमुख है जिसे बजट में कोई महत्व नहीं दिया गया। पायलट ने कहा कि बजट जनाकांक्षाओं के विपरीत है।

बजट से निराश हुए किसान: टिकैत

भाकियू नेता नरेश टिकैत ने कहा कि पिछले कई दिनों से भारत सरकार से ऐसे संकेत मिल रहे थे कि शायद इस बार बजट में किसानों के लिए कुछ ऐसा होने वाला है जिससे खेती-किसानी को दयनीय स्थिति से उबारा जाएगा लेकिन बजट देखने के बाद किसानों के हाथ निराशा ही लगी। जिस तरह से पिछले बरसों में किया जाता रहा उसी तरह से इस बार भी आंकड़ों की बाजीगरी से बजट को अच्छा दिखाने का प्रयास किया गया। इस बजट में किसान के नाम पर बीमा कंपनियों और दूसरे उद्योगों को लाभ देने का प्रयास किया गया है। इस बजट से किसानों की आत्महत्याएं रुकने के बजाए बढ़ने का अंदेशा है।

टिकैत ने कहा कि कृषि क्षेत्र को 2014-15 में 32 हजार करोड़ का आबंटन किया गया। पिछले वर्ष सरकार ने घटा कर 25 हजार करोड़ कर दिया। इस बार 36 हजार करोड़ रुपए की घोषणा की गई है, जिससे सरकार किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद जता रही है। कृषि क्षेत्र को केवल चार हजार करोड़ का आबंटन किया गया है। क्या इससे अच्छे दिन आ सकते हैं। इस बजट से किसानों की छोटी-छोटी उम्मीदों को धक्का लगा है। क्योंकि फसल बीमा योजना के लिए जो 5500 करोड़ का आबंटन किया गया है, उससे बीमा कंपनियों को लाभ होगा।

फसल बीमा योजना में किसान इकाई नहीं है और न ही उसके नुकसान का आकलन उचित तरीके से किया जाता है। इसका सीधा लाभ बीमा कंपनियों को होगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई के लिये आबंटन पर्याप्त नहीं है। जिस तरह से पिछले कई बरसों से किसान सूखे का सामना कर रहे हैं, उसके लिए आकस्मिक सिंचाई, वाटर सैट, भूगर्भ जल रिचार्ज के लिए कम से कम एक लाख करोड़ आबंटन किए जाने की आवश्यकता थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

टिकैत ने कहा कि 2007-8 में मंदी के दौर में उद्योगपतियों को तीन लाख करोड़ रुपए की राहत दी गई थी। वर्तमान स्थिति में खेती की हालत बेहद निराशाजनक है। किसान आत्महत्या कर रहा है, लेकिन सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। किसानों को प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि कर्ज माफी के लिए दो लाख करोड़ का आबंटन कर किसान को कर्जमुक्त करने का काम करेंगे, लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। हमेशा बजट में उद्योग जगत पर ही मेहरबानी की जाती है। यह इस बजट में भी साबित हुआ है।

किसान आय आयोग का गठन न करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। किसानों को उम्मीद थी कि जिस तरह से सर्वे और रिपोर्ट से लगातार आंकड़ा आ रहा है कि 83 प्रतिशत किसानों की आय होती जा रही है। इसके लिए आवश्यक था कि किसान आय आयोग का गठन जाता। उससे किसान की आय को बढ़ाने के तरीके व अन्य दूसरे विकल्पों पर विचार कर किसानों की आय सुनिश्चित किए जाने पर प्रभावी कदम उठाए जाते।

भाकियू नेताओं का कहना है कि बजट का विश्लेषण करने से किसानों को काफी निराशा हुई है। यह भी पहले की तरह आंकड़ेबाजी का बजट है। देश का किसान इस बजट को नकारता है। ऐसे बजट से कृषि और किसान का कोई भला नहीं होने वाला है।

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  1. B
    Babubhai
    Feb 29, 2016 at 7:18 pm
    60 Salome congress NE budget me kya dhad Mari thi ?Aaj ek achha budget aya he phir bhi kadar karne bajay piliya hi dikhata he
    (0)(0)
    Reply
    1. V
      VIJAY LODHA
      Jul 14, 2014 at 2:31 pm
      सौ स्मार्ट सिटी की अवधारणा को मूर्त रूप देने की योजना बेशक सराहनीय है. लेकिन उससे पहले मौजूदा शहरो को पानी,बिजली,सड़कें, शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी जरूरतें मुहैया करना क्या अहम तरीन नहीं है....!
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      Reply
      सबरंग