ताज़ा खबर
 

रिपोर्ट: भारत के बाघों को बचाने में खर्च होंगे 5.7 लाख करोड़, नोटबंदी में कुल जमा की गई रकम का है एक तिहाई

रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने छह टाइगर रिजर्व का अध्ययन किया और अनुमान लगाया कि उनका संरक्षण करना 230 अरब डॉलर की बचत होगी।
एक रिपोर्ट ये सामने आया है कि एक टाइगर को बचाने में हर साल करीब 14 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बाघों और मंगलयान की तुलना करना भले ही अजीब लगता हो लेकिन एक नई रिपोर्ट के अनुसार दो बाघों को बचाने के दौरान होने वाला खर्च स्पस पर जाने ज्यादा खर्चीला है। खबर के अनुसार भारतीय मूल के आस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों के एक ग्रुप ने एक इससे जुड़ी एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट मेकिंग द हिडन विजिबल: इकोनॉमिक वैल्यूएशन ऑफ टाइगर रिजर्व्स इन इंडिया’ के शीर्षक से ‘इकोसिस्टम र्सिवसेज’ जर्नल ये रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में दो बाघों को बचाने के लिए करीब 520 करोड़ रुपए खर्च हुए है जबकि मंगलयान को स्पेस में भेजने का कुल खर्च करीब 450 करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में बाघों की संख्या 2,226 है जिसका मतलब है कि बांघों को बचाने में कुल 5.7 लाख करोड़ रूपए होंगे। ये रकम कुल नोटबंदी के दौरान हुई जमा रकम का करीब एक तिहाई है। कंजरवेशनिस्ट्स का कहना है कि बाघों को बचाने से आर्थिक समझ बेहतर होती है। ऐसा तब होता है जब टाइगर के नेचुरल हैबिटेट्स को बचाने से इकोसिस्टम को फायदा होता है। बाघ के बचाने को केवल पैसे से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने छह टाइगर रिजर्व का अध्ययन किया और अनुमान लगाया कि उनका संरक्षण करना 230 अरब डॉलर की बचत होगी। वहीं भोपाल के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन मैनेजमेंट (IIFM) के प्रोफेसर मधु वर्मा के अनुसार भारत के टाइगर रिजर्व केवल दुनिया के आधे बाघों को पनाह ही नहीं देते बल्कि ये बायोडायवर्सिटी को बनाए रखने में मददगार साबित होते हैं। इससे इकोनॉमिक, सोशल और कल्चरल फायदे भी हैं।

एक रिपोर्ट में ये सामने आया है कि एक टाइगर को बचाने में हर साल करीब 14 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। जबकि 6 टाइगर रिजर्व का एक साल का खर्च करीब 23 करोड़ के आसपास है। विश्लेषकों के अनुसार एक टाइगर को बचाने का आर्थिक फायदा उस पर खर्च किए पैसे से करीब 356 गुना ज्यादा होता है। इतना फायदा कोई भी इंडस्ट्री या सर्विस नहीं दे सकती।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग