May 29, 2017

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केदार घाटी में मानव कंकालों का मिलना हैरानी की बात नहीं: लांगर

केदार घाटी में अब तक मिल रहे मानव अवशेषों को लेकर जारी बहस के बीच रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट राघव लांगर ने रविवार को कहा कि 2013 में हुई त्रासदी की विकरालता को देखते हुए घाटी के विभिन्न हिस्सों से एक दशक बाद भी मानव अवशेष मिलें तो हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए।

Author देहरादून | October 17, 2016 06:08 am

केदार घाटी में अब तक मिल रहे मानव अवशेषों को लेकर जारी बहस के बीच रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट राघव लांगर ने रविवार को कहा कि 2013 में हुई त्रासदी की विकरालता को देखते हुए घाटी के विभिन्न हिस्सों से एक दशक बाद भी मानव अवशेष मिलें तो हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केदार घाटी में मिल रहे मानव कंकालों पर राजनीतिक दलों के हंगामे की वजह से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के मुख्य स्रोत पर्यटन को नुकसान पहुंचेगा। हादसे के तीन साल बाद भी केदार घाटी में मानव अवशेषों के मिलने को लेकर जारी बहस के पीछे तर्क मेरी समझ से परे है। हादसे की विकरालता तो देखें। अकेले केदार घाटी में 3985 लोग लापता हुए थे जिन्हें बाद में मृत घोषित कर दिया गया था। इनमें से केवल 827 लोगों के ही कंकाल मिले थे और उनका क्रियाकर्म किया गया था। लांगर ने कहा कि मानव कंकालों के मिलने से हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जिन लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है, कई टन मलबे के नीचे उनके अवशेष दबे हैं। अब से 25 साल बाद भी केदार घाटी में मानव कंकाल मिलते रहें तो मुझे कोई हैरानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि 2013 की त्रासदी के बाद घाटी के भौगोलिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव हो गया। इसे अपने मूल रूप में आने में लंबा समय लगेगा।


उन्होंने पहाड़ियों और ऊंचे इलाकों में मानव अवशेषों को खोजने के लिए विभिन्न एजंसियों के लंबा अभियान चलाए जाने की सराहना करते हुए कहा कि राशन की समुचित आपूर्ति न हो पाने और अन्य विषमताओं के बीच लगभग जमा देने वाले तापमान में 12000 फुट की ऊंचाई पर 827 लोगों के अवशेषों का पता लगाने के लिए किए गए प्रयासों की खातिर निश्चित रूप से वे सराहना के पात्र हैं।
लांगर ने कहा कि पिछले कुछ बरसों में राज्य सरकार सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश देने में सफल रही है। बड़ी संख्या में लोग चारधाम यात्रा के लिए आने लगे हैं। अब इस मुद्दे पर हल्ला मचाने से यहां आने की योजना बना रहे लोगों के मन में भय बैठेगा और उसका असर पर्यटन पर पड़ेगा।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने हाल में कहा था- वह हमेशा से ही कहते रहे हैं कि केदारनाथ इलाके में अब भी शव पड़े हैं। लेकिन राज्य सरकार ने उनके दावे को असत्य बताते हुए खारिज कर दिया था।
लांगर ने कहा कि गुरुवार को त्रियुगीनारायण और केदारनाथ के बीच घने और चढ़ाई वाले जंगल के रास्ते में मानव कंकाल मिले हैं। तथ्यों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया गया लेकिन फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा- ज्यादातर संभावना यह है कि मार्ग पर मिले मानव कंकाल उन श्रद्धालुओं के हैं जो आपदा के दौरान मारे गए थे। वैसे भी इस इलाके में अंतिम मानव बस्ती वाले तोशी गांव और कंकाल मिलने वाले स्थान के बीच की दूरी 15 किमी है, वह भी चढ़ाई वाली। उस ऊंचाई पर उन लोगों के अलावा और कौन जाएगा जिन्हें अभूतपूर्व संकट का सामना करना पड़ा और जो अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे थे। जाहिर है कि लोग भ्रमित होकर घने जंगल की ओर पहुंच गए और उनकी जान चली गई।

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First Published on October 17, 2016 2:54 am

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