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अखिलेश सरकार पर बरसे राजनाथ सिंह, कहा- सपा सरकार धन का रोना बंद करे

राजनाथ ने कहा कि जनता को यह कहना मूर्ख बनाने वाली बात है कि धन की कमी है। ‘‘केंद्र की ओर से केंद्रीय करों में से राज्यों को आवंटित धन स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक है।
Author लखनऊ | April 3, 2016 19:47 pm
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह (पीटीआई फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश की सपा सरकार पर परोक्ष प्रहार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार (3 अप्रैल) को कहा कि जो सरकार जनता की समस्याओं को नहीं हल कर सकती, उसे नैतिक आधार पर सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है। राजनाथ ने यहां पारख संघ की ओर से आयोजित ‘‘अधिकार दिलाओ रैली’’ में कहा, ‘‘मेरा मानना है कि जो सरकार जनता की समस्याएं नहीं दूर कर सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि धन की कमी का रोना गलत है। ‘‘मैं भी मुख्यमंत्री रहा हूं और मुझे पता है कि प्रदेश का राजकोष कुबेर का खजाना होता है। केवल नीयत होनी चाहिए।’’

राजनाथ ने कहा कि जनता को यह कहना मूर्ख बनाने वाली बात है कि धन की कमी है। ‘‘केंद्र की ओर से केंद्रीय करों में से राज्यों को आवंटित धन स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों की हिस्सेदारी 32 से बढ़ाकर 42 फीसदी कर दी है।’’ उन्होंने कहा कि रोना बंद कर दें तो कुछ हद तक समस्याओं का समाधान हो सकता है।

कश्मीर एनआईटी के छात्रों को मिलेगी पूरी सुरक्षा : राजनाथ

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीनगर के एनआईटी छात्रों को पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों को घबराना नहीं चाहिए। भारत-वेस्टइंडीज टी-20 मैच के बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में दो गुटों के बीच संघर्ष हो गया था।

राजनाथ ने जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा और पुलिस महानिदेशक के राजेंद्र कुमार से बात कर कहा कि वे छात्रों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं छात्रों को आश्वासन देना चाहता हूं कि वे अपनी सुरक्षा की फिक्र ना करें। मैंने राज्यपाल और पुलिस महानिदेशक से हालात पर चर्चा की है। मैंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वह अधिकारियों का एक दल एनआईटी भेजें ताकि वे छात्रों को सुरक्षा का आश्वासन दे सकें।’’

मैच में भारत के हारने के बाद पटाखे फोडने को लेकर छात्रों के दो गुट भिड गये। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण होने पर संस्थान को बंद कर दिया गया था।

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