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एनकाउंटर के दो हफ्ते बाद भी नहीं हो पाया है आनंदपाल का अंतिम संस्‍कार, CBI जांच पर अड़ा परिवार

राजपूत सभा के गिर्राज सिंह ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि पुलिस कमांडो सोहन सिंह को बेहतर उपचार के लिये निजी अस्पताल में भेजा जाना संदेह पैदा करता है।
Author July 12, 2017 12:47 pm
24 जून को मालासर में एक मकान में छिपे आनंदपाल को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। (Photo: Youtube)

राजस्थान के चूरू जिले के मालेसर में गत 24 जून को पुलिस मुठभेड़ में मारे गये कुख्यात वांछित अपराधी आनंदपाल के अंतिम संस्कार को लेकर सरकार और आनंदपाल के परिजनों के बीच मुठभेड़ की सीबीआई जांच की मांग को लेकर गतिरोध बरकरार है। हालांकि सरकार ने पुलिस मुठभेड़ की एसआईटी से जांच कराने का प्रस्ताव दिया है। चूरू जिले के मालेसर गांव में गत 24 जून को पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी आनंदपाल मारा गया था। घटना के दो सप्ताह गुजर जाने के बावजूद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है।

परिजन सरकार से मुठभेड़ की सीबीआई जांच की मांग के साथ साथ न्यायिक हिरासत में बंद आनंदपाल के भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दिये जाने की मांग कर रहे हैं। राजपूत समाज के प्रतिनिधिमंडल और राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी के बीच कल हुई बैठक में सरकार की ओर से मुठभेड़ की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने का प्रस्ताव दिया गया था।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने आज संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार पुलिस मुठभेड़ के लिए उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों का पालन करेगी। हमने कल की बैठक में मामले की जांच एसआईटी से कराने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन समाज के सदस्यों ने कहा कि इस बारे में वे आनंदपाल के परिजनों से चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि मृतक आनंदपाल के परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार अभी तक नहीं किया है, जो मृत आत्मा और शव का अपमान है।

रावणा राजपूत नेता रणजीत सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से एसआईटी की जांच का प्रस्ताव मंजूर नहीं है और मुठभेड़ की जांच केवल सीबीआई से कराई जाये। उन्होंने कहा कि कल की बैठक बेनतीजा रही क्योंकि हमारी मांग है कि आनंदपाल मुठभेड़ की जांच केवल सीबीआई से कराई जाये।

वहीं राजपूत सभा और अन्य सामाजिक संगठनों ने आज गत 24 जून को आनंदपाल और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान घायल हुए कमांडो सोहन सिंह को बेहतर इलाज के लिये जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल से गुडगांव के मेदांता अस्पताल में भेजे जाने पर संदेह जाहिर किया है।

राजपूत सभा के गिर्राज सिंह ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि पुलिस कमांडो सोहन सिंह को बेहतर उपचार के लिये निजी अस्पताल में भेजा जाना संदेह पैदा करता है। कमांडो को पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में बेहतर इलाज के लिये एम्स भेजा जाना चाहिए था। उन्होंने मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने की मांग को दोहराया।

वहीं दूसरी ओर आनंदपाल के परिजनों को समर्थन देने वाले वकील ए पी सिंह ने कहा कि आनंदपाल की पुत्री चीनू की अनुपस्थिति में सरकार के साथ बातचीत सफल नहीं हो सकती। आनंदपाल की पुत्री दुबई में इंजीनियंरिग की पढ़ाई कर रही है और परिजन सरकार से आश्वासन मांग रहे हैं कि जब वह भारत आये तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाये। परिवार के सदस्यों को डर है कि सितम्बर 2015 में आनंदपाल को नागौर की एक अदालत से अजमेर जेल वापस लाने के दौरान पुलिस हिरासत से आनंदपाल के फरार होने के मामले में उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। सरकार की ओर से उसे मामले में क्लीन चिट देने का कोई कदम नहीं उठाया है।

नागौर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आनंदपाल के शव को उसके पैतृक गांव सांवराद में डीप फ्रीजर में रख रखा है। गांव में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गये हैं।

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