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राजस्थान में अस्पताल ने नहीं दी एंबुलेंस तो बेटे के शव को ठेले पर ले जाने को मजबूर हुआ पिता

मृतक का नाम शिवसिंह कोली बताया जा रहा है। उसका विवाह सात महीन पहले ही हुआ था और वह अपने पिता मांगीलाल कोली का इकलौता सहारा था।
(Representative Image)

देश के अधिकांश छोटे शहरों और गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार को हमेशा आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है क्योंकि देश के हर हिस्से में स्वास्थ्य सुविधाओं की दशा चिंताजनक है। ऐसे में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है और इस अभाव में मरीजों की मौत हो जाती है। ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला है राजस्थान के करौली जिले के हिण्डौन सिटी में, यहां समय पर इलाज नहीं मिल पाने से एक मरीज की मौत हो गई।

दरअसल, सुखदेव पुरा निवासी एक युवक की शनिवार को अचानक तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उसे ठेले में लिटाकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डाक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। जिस वजह से उसे एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। युवक की मौत के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमार्टम के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया। लिहाजा, परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को ठेले पर रखकर घर ले गए।

मृतक का नाम शिवसिंह कोली बताया जा रहा है। उसका विवाह सात महीन पहले ही हुआ था और वह अपने पिता मांगीलाल कोली का इकलौता सहारा था। शव को देखकर उसके पिता और परिजन विलख पड़े। वहीं घटना के बाद अस्पताल के अधिकारी डॉ. नमोनारायण मीणा ने बताया कि शिवसिंह कोली को अस्पताल में लाया गया था। डाक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों ने परिजनों से पोस्टमार्टम कराने को कहा लेकिन परिजन बिना पोस्टमार्टम के ही शव को ले गए। उन्होंने बताया कि परिजनों ने न तो स्टाफ से और न पीएमओ से मृतक के शव को एंबुलेंस से घर पहुंचाने के लिए सम्पर्क किया और न ही कॉल किया।

गौरतलब है कि ये कोई पहला मामला नहीं है जब एंबुलेंस नहीं मिलने पर शव को लेकर परिजन को भटकना पड़ा है। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन उसके बावजूद राज्य सरकारें इस विषय को गंभीर रुप से नहीं ले रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी इस मसले पर कुछ कहने से इनकार कर देते हैं। बता दें, अभी हाल ही में कर्नाटक में एक 20 वर्षीय लड़की ने समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण दम तोड़ दिया। जिसके बाद उसके पिता लड़की की शव को साइकिल पर लेकर आए, क्योंकि उन्हें पता था कि उन्हें अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिलेगा।

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