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भ्रष्टाचार पर ‘मीडिया का गला घोंटने वाला’ बिल राजस्थान विधानसभा में पेश, सड़क पर उतरी कांग्रेस, हिरासत में कई नेता

कांग्रेस नेताओं ने काली पट्टी बांधकर प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुवाई में अध्यादेश के खिलाफ जयपुर में राजभवन तक शांतिपूर्ण मार्च किया।
कांग्रेस नेताओं ने काली पट्टी बांधकर प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुवाई में अध्यादेश के खिलाफ जयपुर में राजभवन तक शांतिपूर्ण मार्च किया। (फोटो- ANI)

राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने आज ( सोमवार, 23 अक्टूबर) विधानसभा में उस विवादित बिल को पेश कर दिया है जिसके तहत जजों, मजिस्ट्रेटों और अन्य सरकारी अधिकारियों, सेवकों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा और सरकार की मंजूरी के बिना इनके खिलाफ न तो कोई जांच होगी न ही मीडिया में उनके खिलाफ कुछ छापा जा सकेगा। यह अपराध दंड संहिता (राजस्थान संशोधन) बिल हाल ही में लाए गए अध्यादेश का स्थान लेगी। बिल पेश होते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसका पुरजोर विरोध किया, सदन में हंगामा किया और विधान सभा से वॉक आउट किया। इसके बाद हंगामा बढ़ता देख स्पीकर ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी।

इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने काली पट्टी बांधकर प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुवाई में अध्यादेश के खिलाफ जयपुर में राजभवन तक शांतिपूर्ण मार्च किया। इस दौरान कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि राज्य की बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान हुए करप्शन पर पर्दा डालने के लिए ही इस तरह का तुगलकी अध्यादेश लाया है। उन्होंने कहा कि यह बिल भ्रष्टाचार पर ‘मीडिया का गला घोंटने वाला’ है। हम इसके खिलाफ राष्ट्रपति को भी एक ज्ञापन सौंपेंगे।

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए एक कांग्रेस विधायक ने इसे काला कानून करार दिया है और कहा है कि इसे किसी भी कीमत पर विधानसभा में पास नहीं होने देंगे। विधायक ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम वसुंधरा राजे दोनों के कामकाज का तरीका तानाशाही वाला है। इधर बीजेपी में भी इस प्रस्तावित कानून के खिलाफ विरोध की आवाज उठने लगी है। वरिष्ठ बीजेपी नेता घनश्याम तिवाड़ी ने भी बिल के विरोध में सदन से वॉक आउट किया।

गौरतलब है कि अध्यादेश का स्थान लेने जा रहे नए कानून के मुताबिक मीडिया भी 6 महीने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ न तो कुछ दिखाएगी और न ही छापेगी, जब तक कि सरकारी एजेंसी उन आरोपों के मामले में जांच की मंजूरी न दे दे। इसका उल्लंघन करने पर दो साल की सजा हो सकती है। 6 सितंबर को जारी अध्यादेश आपराधिक कानून (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017 को बदलने के लिए सरकार राजस्थान विधान सभा में आपराधिक प्रक्रिया (राजस्थान संशोधन) विधेयक लाई है। अध्यादेश में प्रावधान है कि सरकार 180 दिनों के अंदर मामले की छानबीन करने के बाद मंजूरी देगी या उसे खारिज करेगी। अगर 180 दिनों में ऐसा नहीं करती है तो माना जाएगा कि सरकार ने जांच की मंजूरी दे दी है।

 

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