December 03, 2016

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इस तरह मौलाना रमजान पाकिस्तानी जासूस को देते थे सेना की जानकारी, हर दस्तावेज के लेते थे 30 से 50 हजार रुपए

नागौर की एक मस्जिद के मौलाना रमजान खान 40 से 50 बच्चों को पढ़ाते थे और इसके लिए उन्हें 2 हजार से 3 हजार रुपए सैलरी दी जाती थी। यही वजह थी कि उन्हें पैसे के लिए फुसलाना बड़ी बात नहीं थी।

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपी सुभाष जांगीर और रमजान खान पुलिस की हिरासत में। (Source: PTI)

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को एक पाक उच्चायुक्त को जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उच्चायोग के वीजा विभाग में काम करने वाला महमूद अख्‍तर भारतीय सेना और रक्षा विभाग की जानकारी पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी आईएसआई को लीक करता था। इस मामले की जांच करने पर राजस्थान के नागौर जिले में एक मुस्लिम टीचर मौलाना रमजान खान को भी पकड़ा गया था। रमजान खान पर महमूद अख्तर को दस्तावेज लीक करने के आरोप हैं।

अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना रमजान के संबंध सेना के कई वर्तमान और पूर्व अफसरों के साथ थे। इन्हीं के जरिए मौलाना ने कई संवेदनशील जानकारी पाक उच्चायुक्त को लीक की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, रमजान एक दस्तावेज के लिए 30 हजार से 50 हजार रुपए तक लेते थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “नागौर की एक मस्जिद के मौलाना रमजान खान 40 से 50 बच्चों को पढ़ाते थे और इसके लिए उन्हें 2 हजार से 3 हजार रुपए सैलरी दी जाती थी। यही वजह थी कि उन्हें पैसे के लिए फुसलाना बड़ी बात नहीं थी।”

वीडियो: जासूसी के आरोप में पकड़े गए पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी को छोड़ा गया; पाकिस्तानी हाई कमिश्नर अब्दुल बासित तलब

रमजान खान के साथ सुभाष जांगीर नाम के एक अन्य शख्स को भी गिरफ्तार किया गया था। 37 साल का सुभाष एक व्यापारी था, जिसका बिजनेस चल नहीं पाया, इसलिए वह पैसा कमाने की तलाश में जुटा था। ज्वाइंट कमिशनर ऑफ पुलिस (क्राइम) रविंद्र यादव ने बताया, “जांगीर पर काफी कर्ज था और रमजान खान को इस बात का पता था, इसलिए रमजान ने उसे इस काम में अपना साथी बना लिया।” रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के जरिए दी गई जानकीर के लिए अख्तर 15 से 20 हजार रुपए देता था। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, यह तीनों कभी भी व्हाट्सऐप या ईमेल के जरिए बातचीत नहीं करते थे।

बता दें कि पुलिस ने गुरुवार (27 अक्टूबर) को 35 साल के महमूद अख्तर नाम के शख्स को पूछताछ के लिए पकड़ा। उसके साथ 50 साल के रमजान खान और 35 साल के सुभाष जांगीर को भी पकड़ा गया। तीनों को दिल्ली के चिड़िया घर के पास से पकड़ा गया था। पकड़े जाने पर अख्तर के पास ‘फर्जी’ आधारकार्ड भी मिला था। पुलिस ने बताया था कि खान और जांगीर अख्तर द्वारा दिए गए निर्देषों को फॉलो करते थे। पुलिस ने यह भी बताया था कि दोनों लोग लगभग दो साल पहले अख्तर से मिले थे। दोनों को राजस्थान में रहने वाले शोएब नाम के प्राइवेट वीजा एजेंट ने अख्तर से मिलवाया था। उसने कहा था कि अख्तर काम के बदले उनको अच्छा पैसा देगा। पुलिस ने गुरुवार रात को ही शोएब को भी पकड़ लिया था।

पूछताछ में अख्‍तर ने बताया कि वह जनवरी 2013 से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए प्रतिनियुक्ति पर है और पाकिस्तानी सेना की 40वीं बलूच रेजीमेंट का हवलदार है तथा रावलपिंडी के काहुटा गांव का रहने वाला है। पुलिस के एक वरिष्‍ठ अधिकारी के मुताबिक, ”चूंकि अख्तर वीजा विभाग में काम कर रहा था, इससे उसे ऐसे लोगों की पहचान करने में मदद मिल गई कि कौन लोग उसके लिए काम कर सकते हैं। जिन लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, उन्हें बड़ी राशि देने का प्रलोभन दिया जाता था।’’

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First Published on October 28, 2016 12:20 pm

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