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राजस्थान में कर्मचारियों के तबादलों के आखिरी दिन मची मारामारी ,कामकाज ठप

राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों का आखिरी दिन होने से सोमवार को प्रशासनिक कामकाज ठप हो गया।
Author जयपुर | October 11, 2016 05:20 am
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों का आखिरी दिन होने से सोमवार को प्रशासनिक कामकाज ठप हो गया। सरकार ने इन दिनों कर्मचारियों के तबादलों पर से रोक हटा रखी है। तबादलों पर मंगलवार से फिर पाबंदी लग जाएगी। तबादलों के खेल में पूरी तरह से राजनीतिक सिफारिशों को महत्व दिया जा रहा है। इससे तबादलों के इच्छुक कर्मचारियों की विधायकों और मंत्रियों के यहां भारी भीड़ उमड़ी। विधायकों के दबाव के कारण ही तबादलों पर से रोक हटाई गई थी।राज्य सरकार ने 9 सितंबर को तबादलों पर रोक हटाई थी। प्रदेश के तमाम सरकारी विभागों के साथ ही निगम और बोर्डो में भी रोक हटाते हुए 28 सितंबर तक ही तबादले करने का आदेश दिया गया था। इस अवधि में तबादलों की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर सरकार ने इसे 10 अक्तूबर तक बढ़ा दिया था। प्रशासनिक सुधार विभाग का कहना है कि कर्मचारियों के तबादले सोमवार तक ही हो सकते हैं। इसके बाद से सभी तरह के तबादलों पर पाबंदी लग जाएगी। इसके कारण ही तमाम सरकारी महकमों में सोमवार को तबादलों की सूचियां बनने का काम होता रहा।

कई विभागों में तो गोपनीय जगह पर तबादला सूचियां बनाई गई। तबादला सूचियां सोमवार देर रात तक जारी रहेंगी। प्रदेश में मंगलवार और बुधवार को सरकारी दफतरों में अवकाश होने के कारण विभागों के आला अफसर तबादलों के काम में ही जुटे रहे। सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर विभागों में मंत्रियों के दफतरों में ही तबादला सूची तैयार की गई। इन्हें सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर ही अफसरों के जरिये जारी करवाया गया।पंचायतीराज, नगरीय विकास विभाग, शिक्षा, चिकित्सा, वन, पर्यावरण, उद्योग, गृह, राजस्व आदि विभागों में तो लगातार तबादला सूचियां जारी हो रही हैं। इसके अलावा सोमवार को राजनीतिक सिफारिशों वाले तबादलों पर काम हुआ। सत्ताधारी भाजपा के विधायकों और पदाधिकारियों का सरकार पर दबाव था कि उनकी पसंद के कर्मचारियों को उनके इलाकों में लगाया जाए। प्रदेश में तहसील और पुलिस थानों में भी विधायकों की पसंद के कर्मचारियों की तैनाती का सिलसिला चला है। प्रदेश भाजपा की कई बैठकों में भी कर्मचारियों के तबादलों पर से रोक हटाने की मांग उठती रही है। विधायकों का कहना था कि कांग्रेस शासन के दौरान तैनात हुए कर्मचारी अभी भी पूर्व पदों पर काम कर रहे हैं। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी पनपी है।

प्रदेश भाजपा का कहना है कि तबादलों में किसी तरह का पक्षपात नहीं हुआ है। विधायकों पर कार्यकर्ताओं का दबाव रहता है। कार्यकर्ताओं के परिजनों को कांग्रेस शासन में प्रताड़ित कर दूरदराज के इलाकों में तैनाती दी गई थी। इस कारण ही विधायकों की पसंद को भी तबादलों में आधार बनाया गया है। सरकार ने तबादले पूरी तरह से प्रशासनिक आधार पर ही किए हैं। प्रदेश में निचले स्तर के कर्मचारियों के तबादलों की प्रक्रिया के बाद सरकार आला प्रशासनिक अफसरों के तबादलों पर गौर करेगी। सरकार में निचले स्तर के कर्मचारियों के तबादलों की ही ज्यादा मारामारी होती है। शासन सचिवालय में भी सोमवार को तबादलों की अर्जियां लेकर सैंकड़ों कर्मचारी घूमते रहे।

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