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राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल और भाजपा की नई टीम बनाने का रास्ता साफ

राज्य में तीन साल से शासन कर रही वसुंधरा राजे सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायकों में खासी उत्सुकता पनपी है।
Author जयपुर | October 12, 2016 09:18 am
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष अमित शाह। (फाइल फोटो)

 

राजस्थान में लंबे अरसे से अटका मंत्रिमंडल फेरबदल और भाजपा की नई टीम गठन का रास्ता अब साफ हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की हरी झंडी मिलने के बाद मंत्रिमंडल और संगठन को नए सिरे से बनाने की कवायद में प्रदेश नेतृत्व जुट गया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी ने अमित शाह से इस सिलसिले में मुलाकात कर उनसे सहमति हासिल कर ली है। प्रदेश भाजपा के प्रभारी वी सतीश की रजामंदी के बाद ही मंत्रिमंडल और भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में बड़ा बदलाव होगा।

राज्य में तीन साल से शासन कर रही वसुंधरा राजे सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायकों में खासी उत्सुकता पनपी है। इसके साथ ही भाजपा नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियां देने का निर्देश भी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुख्यमंत्री को दिया। शाह से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री राजे और प्रदेश अध्यक्ष परनामी के अलावा संगठन प्रभारी वी सतीश भी मौजूद रहे। शाह ने साफ तौर पर अगले चुनाव को लेकर तमाम फेरबदल करने को कहा है। इसके साथ ही वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखने के निर्देश भी प्रदेश नेतृत्व को दिए गए। शाह का साफ कहना था कि सरकार और संगठन के कामकाज का असर जनता में दिखना चाहिए। इसके साथ ही मंत्रिमंडल और संगठन में ऐसे नेताओं को जगह देने की सलाह दी गई है जो कार्यकर्ताओं से तालमेल बैठा सके।

राष्ट्रीय नेतृत्व ने साफ तौर पर कहा कि दिखावटी नेताओं से दूरी बनाई जाए। प्रदेश के सभी वर्गो, समाजों और इलाकों का प्रतिनिधित्व सत्ता और संगठन में होना चाहिए। प्रदेश में मंत्रियों और संगठन की कार्यशैली से नाखुश कार्यकर्ताओं को नए सिरे से जोड़ कर उन्हें भी मुख्य धारा में लाना प्रदेश नेतृत्व का काम है।प्रदेश में दूसरी बार पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद भी अशोक परनामी अपनी कार्यसमिति का गठन नहीं कर पा रहे थे। परनामी को अध्यक्ष बने एक साल के करीब हो गया और नई टीम नहीं बन पाने से भी संगठन का कामकाज धीमा हो गया था। संगठन के साथ ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने का संकेत दे चुकी थीं। इससे ही दोनों का फेरबदल अटक गया था। मुख्यमंत्री अपने कुछ मंत्रियों के कामकाज से नाखुश हैं। इसके साथ ही मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातीय असंतुलन भी है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में से करीब आधा दर्जन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। इनमें से कुछ को संगठन में पदाधिकारी बनाया जा सकता है।

प्रदेश अध्यक्ष परनामी अपनी टीम को दमदार और मजबूत बनाना चाहते हैं। परनामी ने मुख्यमंत्री राजे से कहा भी है कि कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा जाए। इससे आने वाले चुनाव में पार्टी उनका इस्तेमाल कर सकेगी। भाजपा सूत्रों का कहना है कि चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़, जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी, उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सर्राफ जैसे दमदार मंत्रियों को अब संगठन की जिम्मेदारी देने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। मंत्रिमंडल में दलित और आदिवासी तबके की नुमाइंदगी कम होने से इन वर्गो के विधायकों को सरकार में मौका मिलने के आसार बढ़ गए है। सरकार में राजनीतिक नियुक्तियों के लिए भी जातीय आधार में वरिष्ठ नेताओं को सामने लाने के आसार है।

 

 

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