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पहलू खान हत्या: हमले के चश्मदीद का पुलिस FIR में नाम ही नहीं, बताया- मुझे चार-पांच थप्पड़ मारकर वो मुसलमानों के पीछे चले गए

अर्जुन लाल यादव एक अप्रैल को उन दो ट्रकों में सवार छह लोगों में एक थे जिन पर राजस्थान के अलवर में कथित गौरक्षकों की भीड़ ने हमला किया था।
Author April 14, 2017 11:16 am
अर्जुन के चाचा गिरधारी लाल और भाई मुकेश। (Photo: Rohit Paras Jain)

अर्जुन लाल यादव एक अप्रैल को उन दो ट्रकों में सवार छह लोगों में एक थे जिन पर राजस्थान के अलवर में कथित गौरक्षकों की भीड़ ने हमला किया था। हमले में घायल पहलू खान की दो दिन बाद अस्पताल में मौत हो गयी थी। खान की मौत का मामला संसद से सड़क तक गूंजा। ओडिशा के एक कंपनी में 300 रुपये दिहाड़ी पर काम करने वाले अर्जुन काम के समय अपना फोन स्विच ऑफ रखते हैं। 22 वर्षीय अर्जुन केवल अब अपने काम पर “ध्यान” देना चाहते हैं।

गुरुवार (13 अप्रैल) को अर्जुन ने इंडियन एक्सप्रेस को फोन पर बताया, “मैं गाड़ी चला रहा था। उन्होंने मुझे चार-पांच थप्पड़ मारे फिर मुझे छोड़ दिया और मुसलमानों पर पिल पड़े।” पहलू खान की हत्या मामले में 16 लोग को गिरफ्तार किया गया है जिनमें से 11 पर जानवरों की अवैध तस्करी के आरोप में और पांच  को हमले और मारपीट का आरोप है। घटना में चार अन्य लोग घायल हो गये।

अर्जुन के अनुसार वो उस दिन ट्रक नंबर आरजे 14 जीई 7209 चला रहे थे। हमले की घटना में भी अर्जुन को देखा जा सकता है लेकिन पुलिस एफआईआर में उनका नाम नहीं है। एफआईआर के अनुसार पहलू खान हरियाणा के नंबर वाली गाड़ी में अपने बेटों इरशाद और आरिफ के साथ सवार था। वहीं अजमत और रफीक दूसरी गाड़ी में सवार थे। अर्जुन के बारे में पूछने अलवर के पुलिस एसपी राहुल प्रकाश कहते हैं, “मैंने उसके बारे में नहीं सुना।”

अर्जुन पूरे वाकये को तफसील से बताते हैं। वो कहते हैं, “अजमत और रफीक मेरे साथ थे। मैं उन्हें जानता नहीं था। हम बस जयपुर के शनिवार हतवाड़ा (मेले) से खरीदी गयी गायें लेकर जा रहे थे। हमारे पास नगरपालिका की रसीद थी। बहरोर के करीब दो-तीन मोटरसाइकिलों पर आए सवारों ने हमें रोका। उन्होंने हमारे परमिट वगैरह के बारे में कुछ नहीं पूछा बस देखा कि हम गायें लेकर जा रहे हैं।” हालांकि अर्जुन अजमत के उस बयान से इनकार करते हैं जिसमें कहा गया था कि उन लोगों ने गाड़ी रोककर हमारे नाम पूछे और अर्जुन को यह कहकर जाने दिया कि “इसे जाने दो ये हिंदू है।”

अर्जुन के अनुसार, “मैं दरवाजा खोलकर भाग गया। शाम के छह बजे के बाद की बात है। मैं पांच-छह किलोमीटर तक भागता रहा जब तक कि मैं एक ढाबे पर नहीं पहुंच गया। मैं अपना फोन और पर्स गाड़ी में भूल गया था। मैंने ढाबे से अपने चाचा गिरधारी लाल को रात के आठ बजे के करीब फोन किया और उन्हें सब बताया। वो करीब आधी रात को बहरोर पहुंचे।” अर्जुन के चाचा ने वापस लौटते समय उसे डॉक्टर को दिखाया क्योंकि उसके कान में दर्ज हो रहा था। अर्जुन कहते हैं, “मुझे और कोई चोट नहीं लगी थी।”

घर पहुंचने पर अर्जुन ने अपने पिता जगदीश प्रसाद यादव और मां संतोष देवी, भाई मुकेश और दो बहनों को घटना के बारे में नहीं बताया। उसके पिता जगदीश कहते हैं, “मैं गरीब किसान हूं। मैं इन चीजों के बारे में ज्यादा नहीं जानता। उसने मुझे अगली सुबह इसके बारे में बताया।” घटना के बाद 12वीं तक पढ़े अर्जुन के चाचा गिरधारी लाल ने उनकी नौकरी ओडिशा में लगवा दी। अर्जुन छह अप्रैल को ओडिशा में काम करने के लिए चले गये। गिरधारी कहते हैं, “हमारी गाड़ी को पहुंचे नुकसान को ठीक कराने में कम से कम 20 हजार रुपये लगेंगे।”

पुलिस ने विपिन यादव, रविंद्र यादव, कालू राम यादव, दयानंद यादव और नीरज यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अन्य संदिग्धों भीम राठी और दीपक यादव पर पांच हजार का इनाम घोषित किया है। तो क्या पुलिस अर्जुन से इस मामले में संपर्क करेगी? मामले की जांच कर रहे बहरोर के डीएसपी परमाल सिंह कहते हैं, “अभी जांच जारी है। हम कुछ नहीं कह सकते।”

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