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हिन्दुत्व एक आध्यात्मिक लोकतंत्र, मोदी और संघ की सोच में कोई अंतर नहीं: मनमोहन वैद्य

डॉक्टर मनमोहन वैद्य ने कहा कि कभी कभी जो कुछ लोग असामाजिक गतिविधियां करते हैं उन्हें हिन्दुत्व से जोड़ दिया जाता है जो पूरी तरह से गलत है।
Author जयपुर | August 9, 2016 01:12 am
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की प्रतीकात्मक तस्वीर

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉक्टर मनमोहन वैद्य ने सोमवर (7 अगस्त) को कहा कि हिन्दुत्व एक आध्यत्मिक लोकतंत्र है और जो लोग असहिष्णु है वो देश में असहिष्णुता की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व का मतलब राष्ट्रीय बनना और उसकी विचार परंपरा से जुड़ना है। इस देश को जो लोग एक सूत्र के रूप में देखना नहीं चाहते वे ही हिन्दुत्व शब्दावली पर प्रहार करते हैं। वे नहीं चाहते कि हम एक रहे। आरएसएस शाखाओं के बारे में उन्होंने कहा कि देश में कई शाखाएं हैं जहां अन्य धर्मों को मानने वाले लोग भी उसमें शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व एक आध्यात्मिक लोकतंत्र है। देश में असहिष्णुता की बातचीत हो रही है लेकिन जो लोग असहिष्णु हैं वे असहिष्णुता की बात कर रहे हैं।

जयपुर के मालवीय नगर में पाथेय कण पत्रिका भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कभी कभी जो कुछ लोग असामाजिक गतिविधियां करते हैं उन्हें हिन्दुत्व से जोड़ दिया जाता है जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरएसएस की सोच में कोई अंतर नहीं है। फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक चंद्रप्रकाश द्विवेदी, भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विष्वविद्यालय के कुलपति ब्रज किशोर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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