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राजस्थान- मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार

प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की आधी आबादी को अभी भी शुद्व पेयजल और बिजली की सुविधा नहीं मिल पाने से आजादी के मायने अधूरे ही हैं। आजादी के बाद के आधे समय तक प्रदेश की जनता अकाल से ही जूझती रही।
Author August 15, 2017 04:20 am
रिक्शा चलाते गरीब बच्चें।

आजादी के सत्तर सालों में राजस्थान में विकास की रफ्तार धीमी ही रही। देश में क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बडेÞ प्रदेश राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों ने भी यहां लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करवाया है। प्रदेश में बिखरी आबादी के लिए बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ की सुविधाओं को पहुंचाने में हर सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की आधी आबादी को अभी भी शुद्व पेयजल और बिजली की सुविधा नहीं मिल पाने से आजादी के मायने अधूरे ही हैं। आजादी के बाद के आधे समय तक प्रदेश की जनता अकाल से ही जूझती रही। राज्य के सुनियोजित विकास की तरफ ध्यान नहीं देने का नतीजा रहा कि कई इलाके अभी भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

राज्य की साढे छह करोड़ से ज्यादा की आबादी तीन लाख, 42 हजार, 239 वर्ग किलोमीटर में रह रही है। प्रदेश के रेगिस्तानी इलाकों की आबादी तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाना चिंताजनक हालात दर्शाता है। इन इलाकों के गांव और ढाणियों में स्कूल और स्वास्थ केंद्र नहीं के बराबर हैं। प्रदेश के शहरों में तो बदलाव साफ झलकता है पर ज्यादातर गांव अभी भी आजादी के पूर्व की स्थिति में ही हैं। देश के नामी उद्योगपतियों की भूमि शेखावाटी के इलाकों में स्कूल और अस्पतालों के भवन बनाने का काम धन्नासेठों ने कर दिया। इससे सीकर, झुंझनूं, चुरू, बीकानेर, नागौर जैसे जिलों में शिक्षा का स्तर अन्य इलाकों के मुकाबले में अच्छा रहा। उद्योगपतियों की भूमि होने के बावजूद राजस्थान का औद्योगिक विकास 70 साल में मामूली ही रहा। प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार पिछले 20 साल में ही कुछ बढ़ी है।।

ग्रामीण विकास से जुडेÞ संगठन म्हारो राजस्थान में काम करने वाले घनश्याम शर्मा का कहना है कि राज्य में लोगों को शिक्षा और स्वास्थ जरूरतों के लिए अभी भी शहरों की ओर ही भागना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों की ज्यादातर बालिकाओं को तो 12वीं के बाद पढाई छोड़नी पड़ती है। प्रदेश में दस साल पहले साक्षरता अभियान चला था, उसके नतीजे अब अच्छे आ रहे हैं। लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है और आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करने पर जोर है। शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी बहुत कुछ करना है। प्रदेश में 63 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल हैं। इनमें तीन लाख शिक्षकों के जरिये तीन लाख क्लास रूम में 75 लाख बालक बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रहे है। प्रदेश में माकूल स्वास्थ सेवाओं की कमी होने से लोगों को दिल्ली समेत बड़े शहरों के अस्पतालों की तरफ भागना पड़ रहा है। प्रदेश में 70 साल में सड़कों के मामले में नेशनल और स्टेट हाइवे का तो जाल बिछ गया पर ग्रामीण इलाकों में सड़कों की बदहाल स्थिति ही है। 9894 ग्राम पंचायतों के तहत 1 लाख 21 हजार से ज्यादा गांव और ढाणियां है। 69 हजार में ही बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल और सड़क पहुंच पाई हैं।

 

 

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